समुद्र विज्ञान भाग 3

(3)  भू राजनीतिक विभाजन - सागर की महत्ता को देखते हुए संपूर्ण विश्व में सागर को हथियाने संबंधी संघर्ष से बचने हेतु द्वितीय विश्वयुद्ध के उपरांत यूनाइटेड नेशन कांफ्रेंस ऑफ लाॅ ऑफ सी के तहत कुछ नियम बनाए गए जिसके आधार पर संबंधित राष्ट्रों की अधिकारिता तय की गई जो की निम्नलिखित है -

तट रेखा - स्थल खंड के सागर की ओर निकले हुए बिंदुओं को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा तट रेखा कहलाती है सागर में दूरी का मान इसके आधार पर ही किया जाता है।

आंतरिक जलमंडल - तट रेखा तथा तट रेखा के मध्य लागून , बैक वाटर लेक आदि में उपस्थित जल क्षेत्र जिसमें संबंधित राष्ट्र का सर्वाधिकार होता है आंतरिक जलमंडल कहलाता है।  

छेत्री जलमंडल - तट रेखा से 12 नाॅटिकल माइल दूरी का क्षेत्र जो कि संबंधित राष्ट्र की संप्रभुता का क्षेत्र होता है जहां संबंधित राष्ट्र आर्थिक दोहन युद्ध अभ्यास तथा किसी भी प्रकार की सामरिक क्रिया के लिए स्वतंत्र होता है क्षेत्रीय जलमंडल कहलाता है। 

समीपवर्ती जलमंडल - तटरेखा से 24 नॉटिकल माइल दूरी का क्षेत्र जहां संबंधित राष्ट्र आर्थिक दोहन के लिए स्वतंत्र होता है लेकिन स्थाई नौसैनिक अड्डा स्थापित नहीं कर सकता तट रक्षक बल 12 नॉटिकल माइल दूरी पर होते हुए इस मंडल पर नजर रखते हैं तथा किसी विदेशी जहाज के प्रवेश पर पीछा करते हैं इसलिए इसे हॉट परस्वीट जोन कहा जाता है। 

अनन्य आर्थिक क्षेत्र - यह सभी राष्ट्रों के लिए अलग अलग होता है परंतु भारत के संदर्भ में 200 नॉटिकल माइल का है इस क्षेत्र में संबंधित राष्ट्र केवल आर्थिक दोहन ही कर सकता है इसके अलावा उसे अन्य अधिकार नहीं दिए गए हैं।  

( 4 ) - भू-गार्भिक विभाजन - भू-गार्भिक दृष्टिकोण से महासागरीय द्रोणी को दो भागों में बांटा जाता है। 

महाद्वीपीय सीमांत - महाद्वीपों के वह किनारे जो सागरीय जल में डूबे हुए होते हैं महाद्वीपीय सीमांत कहलाते हैं आकारिकी के आधार पर इनको तीन वर्गों में विभक्त किया गया है। 
-महाद्वीपीय निमग्न तट
-महाद्वीपीय निमग्न ढाल
-महाद्वीपीय उत्थान

वितल मैदान - यह सागरीय प्लेट का हिस्सा होता है जोकि महाद्वीपीय अभिसारी क्षेत्र में अवस्थित खाड़ियों से घिरा होता है यह कुल सागरीय क्षेत्रफल का 82.5% पर विस्तृत है जिसका ढाल 1 डिग्री से हमेशा कम पाया जाता है अर्थात या पूर्णता मैदानी क्षेत्र है जहां प्रकाश की अनुपलब्धता के कारण जैविक दशाएं प्राप्त नहीं होती है ।

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