समजात अंग और समरूप अंग-

 समजात अंग-

     ऐसे अंग जो विभिन्न कार्यों के लिए उपयोजित हो जाने के कारण काफी आसामान दिखाई देते हैं परंतु मूल रचना एवं भ्रूणीय परिवर्तन में समान होते हैं समजात अंग कहलाते हैं ।

उदाहरण -सील के फ्लिपर, चमगादड़ के पंख, घोड़े की अगली टांग बिल्ली का पंजा और मनुष्य के हाथ इनकी मौलिक रचना एक जैसी होती है इनमें सभी में ह्यूमरस रेडियो अलना, कार्पल्स ,मेटाकार्पल्स आदि अस्थियां होती हैं इनका भ्रूणीय  विकास एक जैसा होता है सील का  फ्लिपर करने के लिए और चमगादड़ के पंख उड़ने के लिए और घोड़े की टांग दौड़ने के लिए तथा मनुष्य का हाथ वस्तु को पकड़ने के लिए अनुकूलित होता है

 समरूप अंग-

        ऐसे अंग जो समान कार्य के लिए उपयोजित हो जाने के कारण समान दिखाई देते हैं ।

परंतु मूल रचना एवं भ्रूणीय परिवर्तन में भेद होते हैं। समरूप अंग कहलाते हैं 

उदाहरण- तितली पक्षियों तथा चमगादड़ के पंख उड़ने के लिए का कार्य करते हैं।  और देखने में भी एक सामान लगते हैं परंतु इन सभी की उत्पत्ति अलग-अलग ढंग से होती है तितलियां की के पंख रचना शरीर भित्ति के भंज द्वारा और पक्षियों के पंख की रचना इनकी आगेे के  परों द्वारा चमगादड़ के पंख की रचना हाथ की चार लंबी अंगुलियों तथा छड़ के बीच फैली त्वचा से  हुई है।

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