वानर ज्वर ( क्यासनुर जंगली रोग )

कर्नाटक में वानर  ज्वर अर्थात क्यासनुर जंगली रोग का काफी प्रभाव देखने को मिल रहा है। जोकी वायरस के कारण फैल रहा है। 
   सरकार द्वारा इस रोग को पूरे राज्य में फैलने से रोकने के लिए टीकाकरण आदि उपायों की व्यवस्था की जा रही है जिससे इस रोग को नियंत्रित किया जा सके। 

वायरस के कारण फैलने वाले इस रोग को सबसे पहले क्यासनुर जंगल में सन 1957 में एक बीमार बंदर का उपचार करते समय देखा गया था। तब से यह रोग प्रभावी हो गया है और अब तक लगभग 400 मनुष्य प्रति वर्ष इस रोग के चपेट में आ रहे हैं। 

संक्रमित चूहे , छछूंदर और बंदरों के द्वारा यह वायरस अधिकता से फैलता है। इस वायरस से एपीजोओटिक हो जाता है। जिसके कारण बहुत से बंदरों की मृत्यु हो जाती है। 

हार्ड टिक नामक कीटाणु में क्या वायरस पाया जाता है जिसे हेमाफिसैलिस स्पिनिगेरा भी कहते हैं। कोई भी मनुष्य या जानवर यदि इस वायरस की चपेट में आ जाता है तो वह आजीवन इससे ग्रस्त रहता है। 

गाय, बकरी या भेड़ जैसे बड़े पशु भी इस रोग से संक्रमित हो सकते हैं लेकिन इनमें यह रोग इतनी तेजी से नहीं फैलता है जितना कि बंदरों में फैल रहा है। सुनने में यह बात भी आई है कि इन जानवरों द्वारा प्राप्त दूध का सेवन करने से भी यह लोग फैल जाता है लेकिन इसकी अभी तक कोई भी सटीक पुष्टि नहीं हो पाई है। 

मनुष्यों में यह रोग किसी हार्ड टिक  के काटने या संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने से फैलता है। मरे हुए बंदरों के संपर्क में आने से भी यह रोग तेजी से फैलता है। 

यह रोग कभी भी एक मनुष्य से दूसरे मनुष्यों में संचालित नहीं होता है। 

रोग से बचाव के उपाय -  इस रोग से बचाओ के निम्न उपाय हैं

वैसे तो अभी तक इसका कोई खास उपचार नहीं निकला है लेकिन यदि समय रहते संक्रमित व्यक्ति या जानवर को अस्पताल में भर्ती कराकर उसकी चिकित्सा की जाए तो वह समय रहते स्वस्थ हो सकता है। 

उपचार के समय संक्रमित के शरीर में जल के स्तर को बनाए रखना अत्यधिक आवश्यक होता है तथा रोगी के लिए अन्य सावधानियां बरतनी चाहिए जो रक्त स्त्राव रोग के रोगियों के लिए आवश्यक होती है। 

इस रोग से बचाव के लिए लोगों को कीटनाशक रसायनों का उपयोग करना चाहिए और साफ-सुथरे कपड़े पहने चाहिए तथा स्वच्छ जल एवं स्वच्छ खान-पान का ध्यान रखना चाहिए। 

वर्तमान समय में इस रोग से बचाव के लिए भारत में टीका उपलब्ध है जिसका उपयोग संक्रमित स्थानों पर किया जाता है जहां पर यह रोग अधिकता से फैलता है। 

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