1917 ईस्वी की रूसी क्रांति एक खूनी क्रांति थी। यह रूस के इतिहास में साम्यवादी क्रांति के नाम से प्रसिद्ध है। रूसी क्रांति के प्रमुख कारण निम्नवत् हैं-
साम्यवादी विचारों का प्रभाव- मार्क्स और लेनिन के साम्यवादी विचारों में सर्वहारा वर्ग अपने सुनहरे भविष्य की सफलता की कल्पना करने लगा।
किसानों की दयनीय स्थिति- रूस की बहुसंख्यक जनता की जिसका जीवन कृषि पर आधारित था शासन द्वारा उपेक्षा की गई इस समय कृषकों को भू स्वामित्व प्राप्त करने के लिए बड़ी धनराशि राजकोष में जमा करनी पड़ती थी।कृषकों को करो के भारी बोझ का सामना करना पड़ता था । कठोर परिश्रम के बाद भी इन्हें भरपेट भोजन नहीं मिलता था। सामंत वर्ग के लोग इनसे जबरन बेगार कराते थे। इस प्रकार रूस की बहुसंख्यक जनता जार शासन से पूरी तरह असंतुष्ट थी एवं क्रांति के पथ पर चलने को तैयार थी।
श्रमिकों की हीन दशा- यद्यपि 19वीं सदी में रूस का औद्योगिक विकास हुआ तथा देश में बड़े-बड़े कारखाने स्थापित हुए किंतु धनिक वर्ग के लोग इन उद्योगों से अधिक से अधिक मुनाफा कमाने के लिए मजदूरों का शोषण करने लगे । मजदूरों को कम से कम वेतन दिया जाता था तथा उनसे अधिक से अधिक काम लिया जाता था। इस प्रकार मजदूरों की क्रय शक्ति घट गई तथा उन्हें घोर असंतोष पैदा हो गया। मजदूरों का यह असंतोष भी क्रांति का एक प्रमुख कारण बन गया।
भीषण अकाल- जिस समय रूसी जनता जार की दुर्व्यवहार के कारण भूख से व्याकुल होकर हाय - हाय कर रही थी उसी समय रूस में भीषण अकाल पड़ गया जिससे सर्वहारा वर्ग की कठिनाइयां अत्यधिक बढ़ गई फलता भूखे नंगे मजदूर और किसान क्रांति का मार्ग चुनने को बाध्य हो गए।