जनपदीय न्यायालय प्रणाली के अंतर्गत जनपद के दीवानी, फौजदारी तथा राजस्व संबंधी सभी न्यायालय और न्यायाधीश आतें है। इन पर राज्य के उच्च न्यायालय का प्रशासनिक नियंत्रण होता है। प्रत्येक जनपद में तीन प्रकार के न्यायालय होते हैं--
1. दीवानी
2.फौजदारी
3. राजस्व।
1.दीवानी न्यायालय--- जनपद में दीवानी यह व्यवहार के मामलों से संबंधित निम्नलिखित न्यायाधीशों के न्यायालय होते हैं-
*जिला न्यायाधीश का न्यायालय-- जिला न्यायाधीश दीवानी के मामले में बड़ा न्यायाधीश होता है। जिला न्यायाधीश सभी प्रकार के दीवानी के मामलों की प्रारंभिक सुनवाई करता है तथा ₹500000 तक के विवादों की अपील सुनता है। इस प्रकार इस न्यायालय में मुकदमों का निर्णय भी होता है और निचली अदालतों के निर्णय के विरुद्ध अपील भी सुनी जाती है यह जिले के न्यायालय पर नियंत्रण रखता है।
* न्याय पंचायत-- दीवानी विवादों में सबसे निचले स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय पंचायतें हैं उन्हें ₹500 तक के धन विवादों को सुनने का अधिकार है। इस के निर्णय के विरुद्ध अपील नहीं की जा सकती है। इसकी एक विशेषता यह भी है कि कोई भी वकील इसमें मुकदमे की पैरवी नहीं कर सकता है। ऐसा इसलिए किया गया है जिससे ग्रामीण जनता को निष्पक्ष और सस्ता न्याय मिल सके।
*फौजदारी न्यायालय--
सत्र न्यायालय- उच्च न्यायालय की अधीनता में फलदारी न्यायालय का कार्य करने वाले सबसे बड़े न्यायालय को सत्र न्यायालय कहते हैं। इसके मुख्य न्यायाधीश को सत्र न्यायाधीश कहते हैं।इसको फौजदारी के साथ ही दिवानी के मुकदमों के मिलन का भी अधिकार प्राप्त है। जब यह फौजदारी के मुकदमे सुनता है तो सेशन जज कहलाता है।