भारतीय संविधान Easy Notes - 34 (भारतीय संविधान की प्रस्तावना या उद्देशिका)

क्रमशः..

Day - 34

  • प्रायः प्रत्येक अधिनियम के प्रारम्भ में एक प्रस्तवना अथवा उद्देशिका रहती है जिसमें उन उद्देश्यों का उल्लेख रहता है जिनकी प्राप्ति के लिए कोई अधिनियम पारित किया जाता है।
  • भारतीय संविधान की भी रचना जिन उद्देश्यों को लेकर की गई है उनका विवरण संविधान की उद्देशिका में दिया गया है।
  • संविधान सभा की पहली बैठक 09 दिसम्बर 1946 को हुई और कुछ ही दिन पश्चात् 13 दिसम्बर को उद्देश्य संकल्प प्रस्तावित हुआ। इस संकल्प द्वारा संविधान सभा के लक्ष्य और प्रायोजन परिनिश्चित किए गए। इस संकल्प में जो मूल आकांक्षाए थीं वे उद्देशिका में थोड़े से शब्दों में बड़ी सुन्दरता के साथ अभिव्यक्त हुई हैं। उद्देशिका में आकर्षण और प्रवाहमयी भाषा में इन उदात्त सिध्दांतों को समाविष्ट किया गया है।
  • अर्नेस्ट बार्कर ने उद्देशिका की प्रशंसा में यह कहा है – “जब मैं उसे पढ़ता हूँ तो मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि मेरी इस पुस्तक में जो तर्क दिए गए है उन्हें उद्देशिका-संक्षिप्त और सारभूत रूप में प्रस्तुत करती है। मैं उसे उद्धृत करना चाहता हूँ क्योकिं मुझे गर्व है कि भारत के लोग अपना स्वतंत्र जीवन प्रारम्भ करते समय उस राजनीतिक परम्परा के सिध्दान्तों को मान्यता दे रहे हैं जिन्हें हम पश्चिम की परम्परा कहते हैं किन्तु जो पश्चिम तक ही सीमित नहीं है।“
  • संविधान के प्रारम्भ में उद्देशिका दी गई है। यह संविधान का भग है और अत्यधिक महत्वपूर्ण है। जहाँ संविधान की भाषा संदिग्ध होती है, वहाँ इसकी सहयता ली जाती है, क्योंकि इसमें संविधान के उद्देश्य वर्णित हैं।
  • उद्देशिका में केवल एक बार 1976 में 42वें (संविधान) संशोधन अधिनियम द्वारा संशोधन किया किया गया और इसमें ‘समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखण्डताशब्दों का समावेश किया गया।
  • ‘समाजवादी’ शब्द का अभिप्राय अमीर-गरीब के मध्य दूरी कम करना है। ‘पंथ-निरपेक्ष’ का अर्थ सरकार द्वारा सभी धर्मों का समान संरक्षण एवं सम्मान करना है। ‘एकता’ का अभिप्राय भावनात्मक एकता स्थापित करने और ‘अखण्डता’ का अर्थ भौगोलिक एकता से है।

जारी..

मिलते है हम अगले दिन, भारतीय संविधान की प्रस्तावना या उद्देशिका विषय पर फिर  चर्चा करने के लिये..

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