हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा दिये गये उस निर्णय का सविस्तार उल्लेख कीजिए जिसमें नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध बनाने को दुष्कर्म घोषित किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय के पक्ष में कौन से प्रमुख तर्क प्रस्तुत किये हैं? इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा सरकार को क्या निर्देश दिया गया है?

सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा हाल ही में भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अपवाद (2) को नये ढंग से परिभाषित किया गया तथा कहा गया कि 18 वर्ष की लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाना दुष्कर्म की श्रेणी में आता है चाहे लड़की शादीशुदा हो या अविवाहित 
            इस प्रकार स्पष्ट है कि सर्वोच्च न्यायालय ने नाबालिग पत्नी से शारीरिक सम्बंध बनाने को दुष्कर्म घोषित कर दिया है अब ऐसे मामलों में सीआरपीसी की धारा 198 (6) में दी गयी 18 वर्ष से कम आयु की पत्नी से दुष्कर्म पर तय प्रक्रिया का पालन किया जायेगा। किन्तु ऐसे मामलों में पत्नी को घटना होने के एक वर्ष के भीतर शिकायत करनी होगी। घटना के एक वर्ष के बाद न्यायालय के द्वारा शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं की जायेगी। 
    अपने निर्णय के पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा दिए गये तर्कः

  •   सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 375 का अपवाद (2) विवाहित एवं अविवाहित बालिकाओं के बीच भेदभाव करता है अतः यह अनुचित है। 
  •  भारतीय दण्ड संहिता की धरा 375 के अपवाद (2) में जो अंतर किया गया है क्याेकि यह  भारतीय संविधन के अनुच्छेद 15 (3) और अनुच्छेद 21 के विरूद्ध  है। सबसे बढ़कर यह छोटी बालिकाओं के शरीर पर अधि‍कार के विरूद्ध भी है। 
  •   भारतीय दण्ड संहिता की धारा 375 का अपवाद (2) संविधान के अनुच्छेद 14, 15 एवं 21 का उल्लंघन करता है अतः निरस्त किये जाने योग्य है। 

    उपर्युक्त निर्णय के परिप्रेक्ष्य में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा केन्द्र सरकार को दिया गया निर्देशः 

  •     सर्वोच्च न्यायालय ने कानूनी रोक होने के बावजूद बड़ी संख्या में होने वाले बाल विवाहों पर चिंता व्यक्त की तथा केन्द्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों को भी बाल  विवाह को रोंकने के लिए सक्रिय कदम उठाने का निर्देश दिया। 
  •     सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार से कहा कि संविधन की प्रस्तावना में सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गयी है किन्तु सामाजिक न्याय से सम्बंधि‍त कानूनों को उस भावना से नहीं लागू किया जा रहा है जिस भावना से संसद के द्वारा उन्हें अधि‍न‍ियमित किया गया था। 
  •     न्यायालय ने बाल विवाह की स्थिति का उल्लेख करने वाली कई रिपोर्टों के आकड़ों को सामने रखा तथा कहा कि बाल विवाह से बच्चियों के मन एवं शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। 
  •     सबसे बढ़कर न्यायालय ने सरकार से बाल विवाह से सम्बंधि‍त रिपोर्टों का गहनता से अध्ययन करने तथा बाल विवाह रोक अधि‍न‍ियमित को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया। 

निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि नाबालिग पत्नी से शारीरिक सम्बंध को दुष्कर्म घोषित करना निश्चित तौर पर सराहनीय पहल है। इससे नाबालिग बच्चियों के साथ होने वाले अन्याय को नियंत्रित करने में मदद प्राप्त होगी। 
 

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