भारत का वाह्य देशों के साथ घनिष्ठ व्यापारिक संबंध शदियों पुराना रहा है। इन यूरोपीय कम्पनीओं के आगमन से पूर्व भी भारतीयों ने अपने समकालीन देशों के साथ व्यापारिक संबंध बनाये रखा। पंद्रहवीं शताब्दी के पूर्व इस तरह के व्यापार के एशियाई हिस्सौं पर अरबों का व यूरोपीय हिस्सौं पर इटलीवासियों का एकाधिकार था। व्यापार के अति लाभप्रद होने की वजह से इटली की सम्पन्नता दिनानुदिन बढती चली गयी, जिससे प्रभावित होकर नव उदित यूरोपीय राष्ट्रीय राज्य भी इसमें अपनी भागीदारी करना चाहते थे। परन्तु इटलीवासियों के एकाधिकार की वजह से और साथ ही 1453ई० में कुस्तुनतुनिया पर तुर्कों का अधिकार हो जाने की वजह से वे परंपरागत समुद्री मार्ग का प्रयोग नहीं कर सकते थे। फलत: उन्होने नवीन समुद्री मार्ग की तलाश हेतु अपना अभियान प्रारंभ कर दिया। इस तरह की यात्रा को प्रारंभ में स्पेन और पुर्तगाल जैसे देशों ने प्रायोजित किया। इन देशों में जिस भारतीय उत्पाद की सबसे ज्यादा मांग रहती थी वह था मसाला। यूरोप में मसालों की उपयोगिता जाड़े की रितु में मांस को सुरक्षित रखने व उसकी उपयोगिता बनाए रखने के लिए पड़ती थी। शराब को भी मसालों के साथ मिलाकर ऊष्ण पेय के रूप में प्रयोग किया जाता था।
पंद्रहवीं शताब्दी में जिन यूरोपीय कम्पनीओं का भारत में आगमन हुआ वो इस प्रकार हैं -
पुर्तगाल - डच - अंग्रेज - डेनिस - फ्रांसीसी
पुर्तगाली
* पुर्तगाली राजकुमार डॉन हैनरिक को सामुद्रिक अभियानों में काफी रुचि थी इसी वजह से उसे हेनरी द नेविगेटर कहा गया।
* उसने दिक् सूचक यंत्र (कुतुबनुमा) व नक्षत्र यंत्र (एस्ट्रोलैब) के आधार पर गणनाएं करके तालिकाएं तथा सारणियां बनाईं।
** 1487 ई० में पुर्तगाली नाविक बार्थोलोम्यो डियाज ने अफ्रीका के दक्षिण में स्थित उत्तमाशा अंतरीप (Cape of Good hope ) तक की यात्रा की। बार्थोलोम्यो डियाज यहीं से वापस लौट गया।
*** 1492 ई० में स्पेन का कोलम्बस भारत की खोज हेतु आगे निकला। कोलम्बस भारत की वजाय उत्तरी अमेरिका के पास स्थित वेस्टइंडीज द्वीप समूह को खोज बैठा।
* यधपि अमेरिका की खोज का श्रेय कोलम्बस को ही दिया जाता है परन्तु अमेरिका का यह नाम एक प्रसिध्द नाविक अमेरिगो वेस्पुसी के नाम पर पड़ा।
***** इसके बाद 1497 ई० में एक पुर्तगाली नाविक वास्को-डि-गामा लिस्बन से भारत की खोज के लिए निकला। उत्तमाशा अंतरीप होते हुए भारत में केरल के मालाबार तट पर स्थित कालीकट नाम के बन्दरगाह पर 17मई, 1498 ई० को पहुंचा। इस प्रकार, भारत तक पहुँचने के लिए एक नवीन समुद्री मार्ग की खोज हुई जो कि एक महत्वपूर्ण घटना थी।उस समय कालीकट का शासक जमोरिन , एक हिन्दु धर्म मानने वाला राजा था।
* पुर्तगालियों का उस समय नहीं रह रहे अरबवासियों ने जबरदस्त विरोध किया परन्तु पुर्तगालियों ने जल्द ही इन्हें भारतीय व्यापार से बेदखल कर दिया।
पैड्रो अल्वरेज कैब्रल दूसरा पुर्तगाली था जिसने 13 सितम्बर 1500 ई० को भारत की यात्रा की।