प्रोसीडिंग्सि ऑफ द नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेज जर्नल? में प्रकाशित हालिया शोध के अनुसार किस क्षेत्र को विश्‍व में पवन ऊर्जा के उत्पादन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माना गया है? पवन ऊर्जा के उत्पादन के सम्बंध में भारत की प्रगति का सविस्तार उल्लेख कीजिए तथा बताइए कि अन्य देशों की तुलना में भारत की क्या स्थिति

ग्‍लोबल वार्मिंग की बढ़ती समस्‍या के निराकरण के लिए आवश्‍यक हो गया है कि जीवाश्‍म ईंधन पर निर्भरता को कम किया जाये तथा नवीकरणीय ऊर्जा की ओर कदम बढ़ाया जाये। हाल ही में ‘प्रोसीडिंग्‍स ऑफ द नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेज जर्नल’ के शोध के अनुसार, उत्तर अटलांटिक महासागर क्षेत्र में पवन ऊर्जा के उत्‍पादन की व्‍यापक क्षमता निहित है।

इस शोध के अनुसार उत्तर अटलांटिक महासागर क्षेत्र में यदि 30 लाख वर्ग कि.मी. के क्षेत्र में विंड टरबाइन स्‍थापित कर दिए जायें तो उससे सम्‍पूर्ण विश्‍व की ऊर्जा आवश्‍यकता को पूरा किया जा सकता है

क्‍यों पवन ऊर्जा उत्‍पादन के लिए उत्तर अटलांटिक क्षेत्र उपयुक्‍त है?

  • हाल ही में वैज्ञानिकों के द्वारा उत्तर अटलांटिक क्षेत्र का कम्‍प्‍यूटर पर अध्‍ययन किया गया है जिससे ज्ञात हुआ है कि यहां कि भौगोलिक स्थिति पवन ऊर्जा उत्‍पादन के लिए सर्वाधिक उपयुक्‍त है।
  • सामान्‍यत: स्‍थल के मुकाबले समुद्र में हवाओं की गति और बल 70 प्रतिशत अधिक होता है इसलिए उत्तर अटलांटिक महासागर पवन ऊर्जा के लिए उपयुक्‍त है।
  • सबसे बढ़कर उत्तर अटलांटिक में तूफान भी अधिक आते हैं अत: इससे टरवाइन को अधिक हवा प्राप्‍त होगी।

पवन ऊर्जा उत्‍पादन के मामले में भारत की प्रगति :

  • पवन ऊर्जा के उत्‍पादन के मामले में भारत ने हाल के वर्षों में उल्‍लेखनीय प्रगति की है। जुलाई 2017 के अंत तक भारत की कुल स्‍थापित क्षमता 32560 मेगावाट हो गयी है।
  • भारत में पवन ऊर्जा का विकास सर्वप्रथम वर्ष 1986 में प्रारम्‍भ हुआ जब महाराष्‍ट्र के रत्‍नागिरी गुजरात के ओखा एवं तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में पवन ऊर्जा फार्म स्‍थापित किये गये।
  • पवन ऊर्जा के उत्‍पादन के मामले में तमिलनाडु प्रथम स्‍थान पर है जबकि महाराष्‍ट्र,  गुजरात एवं राजस्‍थान क्रमश- द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ स्‍थान पर हैं।
  • चूँकि भारत के पास 7500 किलोमीटर लम्‍बी तटीय सीमा है अत: भारत के पास पवन ऊर्जा उत्‍पादन की व्‍यापक क्षमता विद्यमान है। ज्ञातव्‍य है कि तटीय क्षेत्र पवन ऊर्जा उत्‍पादन के लिए अधिक अनुकूल होते हैं।
  • अन्‍य देशों से तुलना की जाये तो भारत पवन ऊर्जा उत्‍पादन के मामले में चतुर्थ स्‍थान पर है। प्रथम स्‍थान पर चीन तथा द्वितीय एवं तृतीय स्‍थान पर क्रमश: संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका एवं जर्मनी हैं।
निष्‍कर्ष: निष्‍कर्षत: कहा जा सकता है कि ग्‍लोबल वार्मिंग की समस्‍या के निदान के लिए नीवकरणीय ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ानी होगी। इसके लिए सभी देशों को सम्मिलित प्रयास करना होगा क्‍योंकि जलवायु परिवर्तन की समस्‍या साझी समस्‍या है।
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