=> प्रधानमंत्री का चयन व नियुक्ति
प्रधानमंत्री के चयन तथा नियुक्ति के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 75 में कहा गया है कि प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करेगा। राष्ट्रपति अपने विवेकाधिकार से प्रधानमंत्री की नियुक्ति नहीं कर सकता। लेकिन बहुत समय से यह प्रथा चली आ रही है कि राष्ट्रपति उसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त करता है जिसे लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल का नेता चुना जाता है। बहुमत प्राप्त दल का नेता राष्ट्रपति के सामने सरकार बनाने की दावेदारी प्रस्तुत करता है। यदि लोकसभा चुनाव में कोई भी राजनीतिक दल बहुमत प्राप्त नहीं करता तो राष्ट्रपति सबसे बड़े दल के नेता को या ऐसे व्यक्ति को जिससे कई दलों का समर्थन प्राप्त हो, को सरकार बनाने का न्योता देता है। लेकिन उस व्यक्ति को 1 महीने के अंदर लोकसभा में अपना बहुमत साबित करना होता है।जैसे 1979 में चौधरी चरण सिंह, जिन्हें कई दलों से समर्थन प्राप्त हुआ था तथा 1989 में वी.पी सिंह इसी प्रकार दोनों प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए थे। उस समय किसी भी दल को बहुमत नहीं मिल पाया था।
• यदि कार्यरत सरकार के विरुद्ध लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है तो मंत्रिपरिषद को त्याग देना पड़ता है तो इस परिस्थिति में राष्ट्रपति विपक्ष के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करता है लेकिन विपक्ष के द्वारा इंकार करने पर उस व्यक्ति को जिसे कई दलों का समर्थन प्राप्त होता है, सरकार बनाने का न्योता देता है और सरकार गठित होने के बाद 1 महीने के अंदर अपना बहुमत साबित करने का निर्देश देता है।
• 1979 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के त्यागपत्र देने के कारण लोकसभा विपक्ष के नेता वाई.वी चव्हाण को सरकार बनाने का न्यौता मिला था लेकिन उनके इन्कार करने पर कई दलों से समर्थन प्राप्त करने वाले चौधरी चरण सिंह को सरकार बनाने का आमंत्रण दिया गया।