वित्तीय बाजार का अर्थ एवं कार्य (part 2)

३.वस्तु बाजार-
                      एक ऐसा बाजार, जिसमें केवल प्राथमिक वस्तुओं का क्रय- विक्रय किया जाता है, वस्तु बाजार कहलाता है। इसमें प्राथमिक वस्तुओं को दो भागों में बांटा जाता है- १. हार्ड कमोडिटी  २. साफ्ट कमोडिटीज
१. हार्ड कमोडिटी-
                           ये प्रायः प्राकृतिक संसाधन होते हैं जिनका खनन अथवा शोधन किया जाता है, जैसे- सोना एवं तेल आदि।
२. साफ्ट कमोडिटीज-
                                 ये प्रायः कृषि एवं संबंध उत्पाद होते हैं, जैसे- गेहूं, मक्का, कहवा, चीनी, पशुधन एवं मांस आदि।
४. व्युत्पन्न बाजार-
                          व्युत्पन्न बाजार, वह वित्तीय बाजार है जिसमें डेरीवेटिव का बाजार किया जाता है। डेरिवेटिव वित्तीय अनुबंध होता है, जिसका मूल्य किसी अंतर्निहित संपत्ति से निकाला जाता है।
                      डेरिवेटिव भंडार वस्तुओं, मुद्राओं, बाजार सूचकांकों, विनिमय दरों या ब्याज की दरों आदि के रूप में हो सकते हैं। यह वित्तीय उपकरण, किसी अंतर्निहित संपत्ति के भविष्य के मूल्य पर बोली लगाने में सहायता करते हैं।
५. वायदा बाजार-
                          एक ऐसा बाजार, जिसके द्वारा भविष्य के लिए व्यापारिक समझौते और सौदे होते हैं। इन समझौतों के द्वारा दोनों पक्षों क्रेता और विक्रेताओं से वस्तुओं के क्रय और विक्रय द्वारा वायदा किया जाता है। यह समझौते अंशों व मुद्राओं के क्रय-विक्रय के लिए भी किए जाते हैं। जो एक भावी तारीख को निश्चित कीमत पर होते हैं।
६. विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार-
                                             यह मुद्राओं के व्यापार के लिए एक वैश्विक विकेंद्रीकृत बाजार है। इस बाजार के भागीदार बड़े अंतर्राष्ट्रीय बैंक हैं।
              विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार, वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से कार्य करता है विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार मुद्रा रूपांतरण के माध्यम से, अंतराष्ट्रीय व्यापार में निवेश संबंधी सहायता करता हैं।
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