राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत निर्धारित त्रिभाषा फार्मूले का उल्लेरख कीजिए। हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के द्वारा लिए गये उस निर्णय का उल्लेाख कीजिए जिसके तहत त्रिभाषा फार्मूले से विदेशी भाषाओं को बाहर करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही बातइए कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय के इस निर्णय का क्या प्रभाव हो सकता है?

राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत त्रिभाषा फार्मूला निर्धारित किया गया है। त्रिभाषा फार्मूला से तात्‍पर्य यह है कि हिंदीभाषी राज्‍यों में विद्यार्थियों को हिंदी एवं अंग्रेजी के अतिरिक्‍त एक आधुनिक भारतीय भाषा सीखनी होगी।

            इसी प्रकार गैर हिंदीभाषी राज्‍यों में विद्यार्थियों को स्‍थानीय भाषा और अंग्रेजी के अतिरिक्‍त हिंदी भी सीखनी होगी। किंतु अधिकांश संस्‍थान इस फार्मूले का पालन नहीं करते हैं। उल्‍लेखनीय है कि 18 हजार से अधिक सीबीएसई से सम्‍बद्ध संस्‍थानों में से ज्‍यादातर आठवीं कक्षा तक मातृभाषा या हिंदी, अंग्रेजी और एक विदेशी भाषा सिखाते हैं।

विदेशी भाषाओं के सम्‍बंध में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का हालिया निर्णय

  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय के हालिया निर्णय के अनुसार आगामी शैक्षणिक सत्र (2018-2019) से विद्यालयों में जर्मन एवं फ्रेंच जैसी विदेशी भाषायें त्रिभाषा फार्मूले का हिस्‍सा नहीं होंगी।
  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने केन्‍द्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से कहा है कि जो विद्यार्थी विदेशी भाषायें सीखने के इच्‍छुक हैं वे अगल से वैकल्पिक विषय के रुप में चौथी भाषा का चयन कर सकते हैं।
  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय का मानना है कि त्रिभाषा फार्मूले के अंतर्गत संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध भाषायें ही सिखायी जानी चाहिए।
  • इस सम्‍बंध में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का सीबीएसई के साथ विचार-विमर्श जारी और आगामी सत्र से इसे पूरी तरह लागू करने की तैयारी की जा रही है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के इस निर्णय का प्रभाव

  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय के इस निर्णय के सकारात्‍मक एवं नकारात्‍मक दोनों परिणाम देखे जा रह हैं।
  • सकारात्‍मक प्रभाव यह होगा कि इससे देशी भाषाओं अर्थात् आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध भाषाओं का प्रचार-प्रसार बढ़ेगा।
  • जबकि नकारात्‍मक परिणाम के अंतर्गत धर्मनी एवं फ्रांस जैसे देश आपत्ति व्‍यक्ति कर सकते हैं। ज्ञातव्‍य है कि जर्मन भाषा को लेकर पहले ही विवाद खड़ा हो चुका है।
  • उल्‍लेखनीय है कि वर्ष 2011 में केन्‍द्रीय विद्यालय संगठन ने जर्मनी के साथ समझौता किया जिसके तहत जर्मन भाषा को केन्‍द्रीय विद्यालयों में तीसरी अनिवार्य भाषा का दर्जा मिला बदले में जर्मन सरकार के गोथे संस्‍थान ने केन्‍द्रीय विद्यालय संगठन को 700 जर्मन शिक्षक प्रदान किये।
निष्‍कर्ष- निष्‍कर्षत: कहा जा सकता है कि त्रिभाषा फार्मूले के तहत मानव संसाधन विकास मंत्रालय की हालिया पहल सराहनीय है किंतु इस सम्‍बंध में ध्‍यान यह रखना होगा कि विेदशी भाषाओं को उपेक्षा का शिकार न होना पड़े।
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