पृथ्वी के विषय में जानकारी

पृथ्वी का विषुवतीय व्यास 12756.8 किलोमीटर है तथा जल्दी व्यास 12713.8 किलोमीटर है पृथ्वी को लघु अक्ष गोलार्ध कहां जाता है तथा पृथ्वी की आकृति ध्रुवों पर चपटी हुई है। 

पृथ्वी का ध्रुवीय क्षेत्रों में चपटे होने का कारण यह है कि  जब कोई पिंड लगातार घुर्णन कर रहा हो तो उस पिंड का द्रव्यमान केंद्र की ओर एकत्रित होता रहता है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पृथ्वी के घूर्णन के प्रभाव से पोलर पुलिंग फोर्स ध्रुवी क्षेत्र के द्रव्यमान को पृथ्वी के मध्य विस्थापित करता है इस प्रकार जहां पृथ्वी के मध्य भाग में द्रव्यमान में वृद्धि होती है वही ध्रुवों पर इसकी कमी होती है लेकिन पृथ्वी पर पिंड का कुल द्रव्यमान सदैव नियत बना रहता है। 

पृथ्वी दो प्रकार की गति करती है - 
- घूर्णन गति
- परिक्रमण गति

           जब कोई भी पिंड अपने अक्ष के परिता एक पूरा चक्कर लगा ले तो इस प्रकार की गति को उस पिंड की घूर्णन गति कहा जाता है उदाहरण के तौर पर देखे तो लड्डू की गति घूर्णन गति होती है इसी प्रकार पृथ्वी अपने अक्ष पर घूर्णन करती रहती है और पृथ्वी में 23.5 अंश का अक्षीय झुकाव पाया जाता है। पृथ्वी अपने अक्ष पर 23.5 अंश के झुकाव के साथ पश्चिम से पूर्व की ओर 24 घंटे में अपना एक घूर्णन पूरा कर लेती है। 
                   पृथ्वी अपने अक्ष पर घूर्णन करते हुए सूर्य के चारों ओर एक निर्धारित दीर्घ वृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा करती है जिसे सूर्य की परिक्रमण गति कहा जाता है  सूर्य की परिक्रमा पूरा करने में पृथ्वी को 365 दिन का समय लगता है यह पृथ्वी की वार्षिक गति कहलाती है सूर्य की परिक्रमा में पृथ्वी की परिक्रमण गति 29.6 किलोमीटर प्रति सेकंड एवं परिक्रमण पथ की कुल लंबाई 965 मिलीयन किलोमीटर है। 

पृथ्वी की आंतरिक संरचना - पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में हमें जानकारी 2 स्रोतों से प्राप्त होती है - 
-भौतिक स्रोत
-प्राकृतिक स्रोत 

लेख अभी जारी है ..........

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