अक्षांश रेखाओं के बारे में कुछ जानकारी

अक्षांश
पृथ्वी की सतह  पर निर्मित की जाने वाली काल्पनिक वृत्ताकार रेखाएं जो क्षैतिज दिशा में पृथ्वी के केंद्र से समान रूपा वाले स्थानों को जोड़ती है और एक दूसरे के समानांतर होती हैं, अक्षांश रेखाएं कहलाती। प्रति डिग्री अक्षांशों की संख्या 181 है जिसमें 179 अक्षांश रेखाएं हैं।
• भुमध्य रेखा पृथ्वी के मध्य सबसे बड़ा अक्षांशी वृत्त है। इसे विषुवत रेखा एवं वृहद वृत्त कहते हैं। यह जीरो डिग्री अक्षांश रेखा है जो पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में विभाजित करता है।

• 10 डिग्री उत्तरी और 10 डिग्री दक्षिणी अक्षांशो के मध्य वर्षभर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं। यह विषुवत रेखा क्षेत्र कहलाता है। यहां प्रतिदिन दोपहर बाद से सायंकाल तक संवहनीय वर्षा होती है। इस क्षेत्र में सर्वाधिक जैव विविधता पाई जाती है जिसमें ब्राजील के वर्षावन सर्वाधिक जैव विविधता वाले क्षेत्र हैं।

•  23½ डिग्री नॉर्थ को कर्क रेखा तथा 23½ डिग्री साउथ को मकर रेखा कहते हैं। ये दोनों सूर्य की सीधी किरणों की सीमा रेखाएं हैं। इस क्षेत्र को उष्णकटिबंधीय क्षेत्र कहा जाता है जिसमें वर्ष भर में कम से कम सीधी किरणें अवश्य पढ़ती है।

• 66½ उत्तरी अक्षांश को आर्कटिक वृत्त तथा 66½ दक्षिणी अक्षांश को अंटार्कटिक वृत्त कहा जाता है। ये दोनों सूर्य के  तिरछी किरणों की सीमा रेखाएं हैं । 23½ - 66½ के बीच दोनों गोलार्द्धों वर्ष पर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं।

• 90 डिग्री उत्तरी अक्षांश को उत्तरी ध्रुव और 90 डिग्री दक्षिणी अक्षांश को दक्षिणी ध्रुव कहा जाता है। 66½- 90 डिग्री के बीच दोनों गोलार्द्धों दोनों से स्थित क्षेत्र कटिबंधीय क्षेत्र  कहलाता है। यहां 6 माह का दिन और 6 माह की रात्रि होती है।

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