लोकपाल की नियुक्ति हेतु समिति का गठन : लोकायुक्त अधिनियम 2013 के तहत हाल ही में केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि सितंबर, 2018 में 8 सदस्यों वाली एक समिति का गठन किया है। जिसका काम लोकपाल के लिए योग्य उम्मीदवार का चयन करना है। जहां तक इस भ्रष्टाचार विरोधी प्राधिकरण के काम करने के नियमों का प्रश्न है । तो इस प्राधिकरण के गठन के बाद स्वयं यह अपने नियमों को बनाएगी और लागू करेगी । लोकपाल शब्द ओंबड्समैन से लिया गया है।
मुख्य बिंदु
लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 केंद्र में लोकपाल और राज्य में लोकायुक्त के गठन का प्रावधान करता है जिसका मूल उद्देश्य भ्रष्टाचार का निवारण है । लोकपाल में एक अध्यक्ष और अधिकतम 8 सदस्य होगे। लोकपाल भ्रष्टाचार के जिन मामलों को देखेगा उसके अंदर प्रधानमंत्री सहित केंद्र सरकार के सभी सरकारी सेवक होंगे । लेकिन लोकपाल के दायरे में सेना नहीं आएगी । अधिनियम के अनुसार लोकपाल को यह अधिकार दिया गया है । कि वह भ्रष्ट तरीकों से अर्जित संपत्ति को जप्त कर सकता है । चाहे संबंधित मुकदमा वर्तमान में चल ही क्यों न रहा हो। इस अधिनियम के अनुसार इसके प्रभावी होने के 1 वर्ष के अंदर सभी राज्यों को अपना - अपना लोकायुक्त गठित कर लेना होगा। लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम ,2013 में यह सुनिश्चित किया गया है कि जो सरकारी सेवक भ्रष्टाचार के किसी मामले के बारे में पहले सूचना देंगे उनको सुरक्षा प्रदान की जाएगी । लोकपाल सीबीआई समेत किसी भी जांच एजेंसी को कोई मामला जांच के लिए भेज सकता है और उनके परीक्षण और निगरानी कर सकता है। यदि किसी सरकारी सेवक के विरुद्ध प्रथम दृष्टया मामला बनता है तो लोकपाल जांच एजेंसी द्वारा पड़ताल आरंभ होने के पहले भी उसको को बुला सकता है और पूछताछ कर सकता है।