अशोक का धर्म परिवर्तन - कलिंग युद्ध के भयंकर नरसंहार बाद अशोक ने अपना रुक धर्म की ओर परिवर्तन कर लिया, अशोक पहले ब्राह्मण धर्म का अनुयाई था । महाभारत के अनुसार वह प्रतिदिन 60000 ब्राह्मणों को भोजन दिया करता था और अनेक देवी- देवताओं की पूजा करता था । कल्हण की राजतरंगिणी में से पता चलता है कि वह शैव धर्म का उपासक भी था । एक दिन अपने राज भवन की खिड़की से अपने बड़े भाई सुमन के पुत्र श्रमण को भिक्षा के लिए जाते हुए देखा और उसके व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुआ । श्रमण के प्रवचन को सुनकर उसने बौद्ध धर्म अपना लिया बाद में वह मोग्लीपुत्त तिस्स के प्रभाव में आ गया ।
उत्तर भारत की अनुक्षृतीयों के अनुसार उपगुप्त ने अशोक को बौद्ध धर्म में दीक्षित किया। इन भिक्षुओं की शिक्षा तक संपर्क से अशोक का रुझान बौद्ध धर्म की ओर बढ़ रहा था । एक साधारण बौद्ध होने के बावजूद अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया । कलिंग युद्ध के नरसंहार से अशोक की अंतरात्मा को तीव्र आघात पहुंचा । इस पश्चाताप के परिणामस्वरूप अशोक ने विधिवत बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया। लगभग 1 साल तक उसने बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार सक्रियभाग नहीं लिया । परंतु एक उपासक के रूप में 10 वें वर्ष बोधगया की यात्रा की। वह 12 में वर्ष निगालि सागर एवं 20वें वर्ष लुंबिनी गए।