मंत्री परिषद के मंत्रियों का कार्यकाल एवं मंत्रिपरिषद का आकार

संविधान के अनुच्छेद 75(1) के अनुसार प्रधानमंत्री का चयन राष्ट्रपति करता है तथा प्रधानमंत्री की सलाह से राष्ट्रपति अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है।
• राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के परामर्श पर मंत्रियों की नियुक्ति करता है। प्रधानमंत्री द्वारा अपने पद की शपथ लेने के बाद अन्य मंत्रियों के नामों और उनके विभागों की सूची राष्ट्रपति को सौंपता है। राष्ट्रपति सामान्यतः सूची पर अपनी स्वीकृति प्रदान कर देता है।

मंत्रियों का कार्यकाल

• मंत्री परिषद का कार्यकाल निश्चित नहीं होता। मंत्रिपरिषद तभी अपने पद पर रहती है जब तक कि उसे लोकसभा का विश्वास प्राप्त हो।
• वह अधिक से अधिक लोकसभा का कार्यकाल तक (जो 5 वर्ष होता है) , अपने पद पर  बनी रहती है।
• व्यक्तिगत रूप से किसी मंत्री का कार्यकाल प्रधानमंत्री का उसके विश्वास पर निर्भर करता है।

=> मंत्री परिषद का आकार
मूल संविधान में मंत्री परिषद के आकार के संबंध में कोई प्रावधान नहीं है। संविधान के 91 वें संविधान संशोधन अधिनियम 2003 के द्वारा अनुच्छेद 75 (1) (क) में यह प्रावधान किया गया है कि मंत्रिपरिषद सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी। वर्तमान में मंत्री परिषद में अधिकतम 83 मंत्री हो सकते हैं।
• खंड (1) ख के अनुसार यदि किसी दल के 1/ 3 विभाजन करके दल बदलते हैं तो उनकी सदस्यता स्वत समाप्त हो जाएगी। ऐसा व्यक्ति तब तक मंत्री, विभागाध्यक्ष या किसी अन्य लाभ का पद ग्रहण नहीं कर सकेगा जब तक कि वह पुनः निर्वाचित ना हो जाए।

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