पृथ्वी के विषय में जानकारी भाग - 2

पृथ्वी की आंतरिक संरचना 

1-भौतिक स्त्रोत - पृथ्वी की आंतरिक संरचना के भौतिक स्त्रोतों को तीन भागों में विभक्त किया गया है ।
-तापमान
-घनत्व
-दाब

तापमान - तापमान के अनुसार अध्ययन के क्रम में पृथ्वी सतह से केंद्र की ओर जाने पर तापमान में वृद्धि का अनुभव किया गया जिसके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि प्रत्येक 32 मीटर की गहराई पर जाने पर 1 डिग्री तापमान में वृद्धि हुई लेकिन लंबाई के साथ साथ तापमान वृद्धि की दर धीमी होती गई क्योंकि लगातार वृद्धि इसी क्रम में होने पर 95 किलोमीटर की गहराई पर तापमान इतना अधिक हो जाएगा कि कोई भी पदार्थ ठोस अवस्था में रह ही नहीं सकता।  इस प्रकार तापमान आधारित अध्ययन के अनुसार पृथ्वी की ऊपरी परत को ठोस पदार्थ से निर्मित बताया गया जिसका आधार ज्वालामुखीयता को बनाया गया। 
       तापमान पर आधारित अध्ययन के आलोचना में कहा गया कि ऊपर की परतों में रेडियोएक्टिव पदार्थों में पदार्थों की मात्रा अधिक होने के कारण तापमान में वृद्धि की दर अधिक होती है जबकि नीचे की परतों में तापमान में वृद्धि की दर कम हो जाती है। 

घनत्व - दाब में वृद्धि द्वारा पदार्थ के घनत्व में एक सीमा तक ही परिवर्तन हो सकता है इसके पश्चात पदार्थ के अनुभव का विरोध कर देंगे या अपनी प्रत्याशा सीमा को पार कर जाएंगे जिससे पदार्थ के स्वरूप में परिवर्तन हो जाता है।  
     घनत्व सतह से केंद्र की ओर जाने पर पृथ्वी की आंतरिक परतों का घनत्व ज्यादा होगा। 
         इस संबंध में दो मत प्रस्तुत किए गए - 
पहला मत यह था कि पृथ्वी के अंदर पदार्थ तो वही हैं जैसे सतह पर पाए जाते हैं किंतु ऊपरी परतों के दाब के कारण आंतरिक परतों का घनत्व बढ़ जाता है।  
इसकी आलोचना में यह कहा गया कि प्रत्येक पदार्थ की एक निश्चित प्रत्यास्थ सीमा होती है जिसके बाद दाब में वृद्धि से घनत्व में वृद्धि संभव नहीं है। 

दूसरा मत यह है कि पृथ्वी के विभिन्न परतों में पाए जाने वाले पदार्थों के रासायनिक संगठन में अंतर पाया जाता है। जिसके कारण घनत्व में वृद्धि होती है। 
    इस्मत की आलोचना करते हुए या कहा गया कि इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाता की विभिन्न परतों की मोटाई कितनी है इसके साथ ही इन परतों की भौतिक विशेषताएं भी स्पष्ट नहीं हो पाती है। 

दाब - दाब आधारित अध्ययन पर यह विचार व्यक्त किया गया कि तापमान के प्रभाव का अध्ययन करते समय दाब के प्रभाव को सम्मिलित नहीं किया गया क्योंकि दाब गलनांक बिंदु के समानुपाती होता है। 
अत: अधिक तापमान होने पर भी ऊपर की परतों का दाब अधिक होने के कारण पदार्थ ठोस अवस्था में हो सकता है इस प्रकार दाब के अध्ययन पर दिए गए प्रमाण के अनुसार पृथ्वी ठोस पदार्थों से निर्मित गोलाकार पिंड के समान है यह बताया गया। 

     लेख जारी है ........

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