प्रधानमंत्री के अलावा कैबिनेट, राज्यमंत्री व उपमंत्री सामूहिक रूप से मंत्री परिषद कहा जाता है। संविधान में मंत्रिपरिषद के सदस्यों को विभिन्न भागों में वर्गीकृत नहीं किया गया है।
मंत्री परिषद की कार्यप्रणाली
• मंत्री परिषद की ओर से कैबिनेट एक इकाई के रूप में कार्य करता है। इसकी बैठक सप्ताह में एक बार होती है लेकिन प्रधानमंत्री किसी भी समय बैठक बुला सकता है।
• मंत्री परिषद की बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करता है। यदि प्रधानमंत्री किसी कारणवश बैठक में नहीं आ पाता अथवा अनुपस्थित रहता है तो प्रधानमंत्री के द्वारा नामित कोई वरिष्ठम मंत्री बैठक की अध्यक्षता करता है।
मंत्रिपरिषद की बैठक के लिए कोई भी निश्चित कोरम (न्यूनतम सदस्यों की उपस्थिति) नहीं होती है
• कैबिनेट प्रत्येक मामलों पर सभी की सहमति से निर्णय लेता हैं। यदि निर्णय में किसी प्रकार का मतभेद होता है तो निर्णय बहुमत के आधार पर किया जाता है और इस प्रकार बहुमत से लिया गया निर्णय सभी मंत्रियों का संयुक्त निर्णय माना जाता है। अगर कोई मंत्री मंत्रिपरिषद के निर्णय से सहमत नहीं होता है तो उसे अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ता है।
• सर्वप्रथम 1950 ईस्वी में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी और के सी नियोगी ने और उसके बाद डॉक्टर मथाई और श्री देशमुख ने भी मंत्रिमंडल के निर्णय से मतभेद के कारण त्यागपत्र दिया था।