इंग्लिश ईस्ट इन्डिया कम्पनी
भारत आने वाली यूरोपीय कम्पनीओं में डच कम्पनी के बाद जिसका आगमन हुआ वह इंगलिश ईस्ट इन्डिया कम्पनी थी। अन्य यूरोपीय कम्पनीओं की तुलना में यह कम्पनी ज्यादा शक्तिशाली साबित हुई और अंतत अपने आप को भारत में मुगलों के उत्तराधिकारी के रुप में स्थापित करने में सफल हो गयी।
** 1599 ई० में जॉन मिल्डेन हॉल एसा पहला अँग्रेज था, जो स्थल मार्ग से भारत आया।
** 31 दिसम्बर, 1600 ई० ब्रिटेन की महारानी ने एक शाही फरमान जारी कर पूर्वी देशों के साथ व्यापार करने के लिए शेयरधारकों की एक कम्पनी को 15 वर्षों के लिए एकाधिकार प्रदान किया। दूसरे शब्दों में, इंगलिश ईस्ट इन्डिया कम्पनी इसी दिन अस्तित्व में आई।
* बाद में स्टुअर्ट वंशीय शासक जेम्स प्रथम ( 1603-25) ने इस एकाधिकार को बढ़ाकर अनिश्चित काल के लिए कर दिया।
***** 1608 ई० में विलियम हॉकिंस, 'हैक्टर' नामक जहाज का कप्तान बनकर सूरत बन्दरगाह पर उतरा।
* सूरत में अँग्रेजों की पहली फैक्ट्री की स्थापना की अनुमति हेतु उसने आगरा जाकर जहाँगीर से मुलाकात की। उसने तुर्की भाषा में जहाँगीर से बातचीत की।
* जहाँगीर उससे काफी प्रभावित हुआ और उसे 400 का मनसब तथा 'खान' की उपाधि सहित आगरा में बसने की अनुमति प्रदान की।
* 1613 ई० में सूरत में अँग्रेजों ने अपनी फैक्ट्री की स्थापना की, जो कि पश्चिमी भारत में उनकी पहली व पूरे भारत में उसकी दूसरी फैक्ट्री थी।
उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व 1611 ई० में मसूलीपट्टनम् में अँग्रेजों की पहली फैक्ट्री की स्थापना हो चुकी थी।
* 1615 ई० में ब्रिटिश सम्राट जेम्स प्रथम का दूत बनकर सर टॉमस रो सूरत बन्दरगाह पर उतरा और अजमेर में जाकर जहाँगीर से मुलाकात की। वह 3 वर्षों तक मुगल दरबार में इंग्लैण्ड का दूत बनकर रहा।
* 1633 ई० में पूर्वी तट पर अंग्रेजों ने अपना पहला कारखाना बालासोर और हरिपुरा ( दोनों उड़ीसा में ) स्थापित किया।
* 1639 ई० में फ्रांसिस डे नामक अंग्रेज को चन्द्रगिरि के राजा से मद्रास पट्टे में प्राप्त हो गया। यहां पर अंग्रेजों ने फोर्ट सेंट जोर्ज नामक दुर्ग की स्थापना की, जो कि कोरोमण्डल तट पर दक्षिण भारत का मुख्यालय बना।
*1661 ई० में की गई एक संधि के अनुसार स्पेन ने इंग्लैण्ड के शासक चार्ल्स द्वितीय को पुर्तगाल की राजकुमारी कैथेरीन ब्रगेन्जा से विवाह करने पर बंबई का बन्दरगाह दहेज में दिया।
*1668 ई० में इस बंबई शहर को युवराज चार्ल्स द्वितीय ने कम्पनी को 10 पौण्ड वार्षिक के बदले में प्रदान कर दिया। इसके परिणामस्वरुप बंबई प्रेसिडेंसी का प्रार्दुभाव हुआ।
*1698 ई० में बंगाल के तत्कालीन सूबेदार अजीम-उस-शान ने सुतानाती, कालिकाता और गोविंदपुर नामक तीनों गावों की जमींदारी ईस्ट इन्डिया कम्पनी को प्रदान कर दी। इसके लिए अंग्रेजों को पुराने जमींदार इब्राहिम खान को 1200 रु० प्रति वर्ष देने थे। इन तीनों गावों को मिलाकर ही आधुनिक शहर कलकत्ता को बसाया गया। यहाँ की कोठी को फोर्ट विलियम ( स्थापना-1699 ई०) के नाम से पुकारा जाता था, जो कि 1700 ई० में ईस्ट इन्डिया कम्पनी का मुख्यालय बना।
* 1717 ई० में जॉन सुरमन के नेतृत्व में अंग्रेज व्यापार प्रतिनिधियों का एक दल सम्राट फर्रुखसियर के दरबार में उपस्थित हुआ।
* इस प्रतिनिधि मण्डल में एड्वर्ड स्टीफेन्सन, ख्वाजा सेहुर्द ( एक आर्मेनियन दुभाषिया ) तथा जॉर्ज हैमिल्टन ( सर्जन डॉक्टर ) आदि शामिल थे।
* उस समय फर्रुखसियर एक गम्भीर फोड़े से पीडित था, जिसका सफलतापूर्वक इलाज हैमिल्टन ने कर दिया तथा फर्रुखसियर ने खुश होकर इसी वर्ष कम्पनी के नाम फरमान जारी किए, जिसे इंगलिश कम्पनी के इतिहासकार के रूप में प्रसिध्द आर्म्स ने 'कम्पनी के इतिहास का मैग्नाकार्टा कहा'। इस फरमान के अंतर्गत कम्पनी को बंगाल, बिहार व उड़ीसा में 3000 रु० वार्षिक के बदले करमुक्त व्यापार करने के पुराने अधिकार को मान्यता प्रदान कर दी गयी। इसे दस्तक या फ्री पास कहकर पुकारा गया।
उल्लेखनीय है कि यही फरमान कालान्तर में बंगाल के नवाब और कम्पनी के बीच संघर्ष का कारण बना।
(ब्रिटिश ईस्ट इन्डिया कम्पनी का टॉपिक समाप्त।)