Ashish Verma:
ऑटोबान बिस्मार्क शानहार्जेन का जन्म 1815 ईस्वी में ब्रेंडेनबर्ग के एक जमीदार परिवार में हुआ था। उसकी बुद्धि बड़ी कुशाग्र थी। उसकी प्रारंभिक शिक्षा बर्लिन में हुई थी। उसने गोर्टिजन और बर्लिंन विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त की थी
इसके पश्चात वह प्रशा की नागरिक सेवा में भर्ती हो गया, परंतु उसका मन नौकरी में नहीं लगा। दो वर्ष बाद उसने नौकरी छोड़ दी और अपनी पैतृक जागीर की देखभाल करने लगा । उसने इंग्लैंड, फ्रांस आदि यूरोपीय देशों की यात्राएं भी की।
1845 ईस्वी में वह पोमेरेनिया की प्रांतीय संसद का सदस्य नियुक्त हुआ। 1847 ईस्वी में प्रांतीय परिषद ने उसे प्रशा की संसद में अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजा। 1848 इस्वी में उसने जनता द्वारा जर्मनी के एकीकरण का विरोध किया। फ्रैंकफर्ट की राष्ट्रीय महासभा की भी उसने कटु आलोचना की।1851 ई. में प्रशा के शासक ने उसे अपना राजदूत बनाकर रूस भेजा। 1862 ईसवी में राजदूत बनाकर वह पेरिस भेजा गया । 1862 ई. में प्रसा के शासक विलियम प्रथम ने उसे चांसलर के पद पर नियुक्त किया । सीवेल के शब्दों में "उस दिन से वास्तव में एशिया और जर्मनी के लिए और इस प्रकार यूरोप के लिए एक नया युग प्रारंभ होता है।"बिस्मार्क लोकतंत्र ,उदारवाद तथा क्रांतिकारी विचारों का विरोधी था।