संवेग, संवेग संरक्षण का नियम और उसके उदाहरण

संवेग 

किसी वस्तु के द्रव्यमान व वेग के गुणनफल को वस्तु का संवेग कहते हैं।
                  संवेग = द्रव्यमान ×वेग
संवेग को प्रदर्शित करने के लिए परिमाण के साथ-साथ दिशा की जरूरत होती है। अतः संवेग आदिश राशि है। संवेग p का मात्रक किलोग्राम मीटर / सेकंड अथवा न्यूटन- सेकंड होता है।
• एक भारी और एक हल्की वस्तु का संवेग जो समान वेग से गतिशील है, का संवेग अधिक होगा अर्थात एक समान वेग से गतिशील एक भारी वस्तु और एक हल्की वस्तु का वेग अधिकतम होता है।
• यदि एक भारी व एक हल्की वस्तु के संवेग समान है हो तो हल्की वस्तु का वेग भारी वस्तु के वेग से ज्यादा होता है।


=> संवेग संरक्षण का नियम (principle of conservation of momentum)

• यदि दो अलग-अलग वस्तुओं के निकाय पर कोई बाहरी बल ना लगाया गया हो तो निकाय का संपूर्ण संवेग अपरिवर्तित रहता है अर्थात दो पिंडों के टकराने के पहले और टकराने के बाद का कुल संवेग बराबर होता है।
• यदि किसी वस्तु पर लगाए गए बलों का मान शून्य है अर्थात परिणामी बल का शून्य है तो वह वस्तु स्थिर रहता है, यही संवेग संरक्षण का नियम है।
अर्थात कुल परिणामी बल (f)= 0 तो संवेग = स्थिरांक


संवेग संरक्षण के उदाहरण
1. बंदूक से गोली चलाने पर पीछे की और झटका कम लगना इसका एक कारण यह है कि बंदूक का द्रव्यमान गोली के द्रव्यमान से अधिक होता है जिससे बंदूक के पीछे हटने का वेग गोली के वेग से बहुत कम होता है।

2. राकेट का ऊपर जाना संवेग संरक्षण के नियम पर आधारित है।
3. जब बराबर संवेग  वाली दो गेंदें आपस में टकराती हैं तो गेंद अचानक रुक जाती है।

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