प्रशांत महासागर से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी part -3

• त्रीमोर द्वीप का पूर्वी भाग वर्ष 2002 में इंडोनेशिया से अलग हो गया और इसे पूर्वी तिमोर कहा जाता है। इसकी राजधानी दिल्ली।

• ऑस्ट्रेलिया को प्यासी भूमि का देश कहा जाता है। इसकी खोज कैप्टन कुक ने की। इसकेे उत्तर में पपुआ न्यू गिनी द्वीप है जो ग्रीनलैंड के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा द्वीप है। टांरस जलसंघ में अराकूरा सागर और कोरल सागर को जोड़ती है तथा आस्ट्रेलिया से पपुआ न्यू गिनी को अलग करती है

• ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी भाग में कारपेंटिया की खाड़ी है तथा उत्तर पूर्वी तटीय क्षेत्र में विश्व के सबसे बड़े प्रवाल भित्तियों द्वारा निर्मित लूंगा चट्टानों के बीच पाए जाते हैं जिससे ग्रेट बैरियर रीफ कहा जाता है। इसके चारों ओर स्थित सागर कोरल सागर कहलाता है।

• ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण उसका तस्मानिया द्वीप है जो बास जलसंधि द्वारा अलग होता है। इसके पूर्व में न्यूजीलैंड द्वीप पर है। कुक जलसंधि न्यूजीलैंड को उत्तरी और दक्षिणी भाग में विभाजित करती है। दक्षिण न्यूजीलैंड में दक्षिण एलपस पर्वत है।

• न्यूजीलैंड के ऊपर छोटे-छोटे द्वीपों के समूह है जिसमें फिजी, वानुअतु, तवालु,  कैलीडोनिया, सोलोमन द्वीप,  बिस्मार्क द्वीप, मार्शल द्वीप, नौरु प्लाउ, किरोबाती हैं। इन द्वीपों को मेलानेशिया, माइक्रोनेशिया एवं पालीनेशिया के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इन द्वीपों से न्यूजीलैंड, पपुआ न्यू गिनी एवं ऑस्ट्रेलिया संयुक्त रूप से ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप का कहलाते हैं अन्यथा ऑस्ट्रेलिया एक देश है जिसकी राजधानी  कैनबरा है।

• सागर का सबसे गहरा गर्त कहलाता है। पृथ्वी पर कुल 57 गर्तों की पहचान हुई है जिसमें सर्वाधिक 32 गर्तें प्रशांत महासागर में तथा 19 गर्तें अटलांटिक महासागर में तथा 6 गर्तें हिंद महासागर में स्थित है। पृथ्वी पर पाई जाने वाली सबसे गहरी गर्त प्रशांत महासागर में फिलीपींस के निकट मेरियाना गर्त (11022-11033 मी०) है।
• इसका सबसे गहरा बिंदु चैलेंजर कहलाता है। इसलिए इसे चैलेंज गर्त  भी कहते हैं। इसके अतिरिक्त मिण्डानाओं  गर्त और टोंगा गर्त इस महासागर के प्रमुख करते हैं।
• अटलांटिक महासागर की सबसे गहरी गर्त वेस्टइंडीज में पूर्तोरिक गर्त है।
• हिंद महासागर की सबसे गहरी गर्त सुंडागर्त / जावा गर्त है।

Posted on by