मानव संसाधन और पर्यावरण

*किसी देश की संपूर्ण जनसंख्या को मानव संसाधन नहीं कहा जाता, अभी तो जनसंख्या के केवल उस भाग को मानव संसाधन कहा जाता है जो शिक्षित हो कुशल हो तथा जिसमे अर्जन उत्पादन करने की क्षमता हो। इस प्रकार मानव संसाधन वह मानव पूंजी है जिसे प्राकृतिक संसाधनों में लगाकर देश का आर्थिक विकास किया जाता है। दूसरे शब्दों में यह भी कह सकते हैं कि देश के संपूर्ण मानव संसाधन को तो जनसंख्या कहा जा सकता है किंतु पूरी जनसंख्या को मानव संसाधन नहीं कहा जा सकता है।

* पर्यावरण या प्राकृतिक संसाधन से आशय उन सभी प्राकृतिक वस्तुओं से लिया जाता है जो हमारे चारों ओर व्याप्त है। यह वस्तु है---- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, वनस्पति व जीव जंतु।

* प्रकृति ने भारत को प्राकृतिक या पर्यावरण संसाधन उपहार के रूप में बड़ीी उदारता से प्रदान किए गए हैं तथा इन पर्यावरण संसाधनों सदुपयोग करने केेेे लिए विशााल जनसंख्या भी दी है, * हमारी अधिकांश जनसंख्या मानव संसाधन के रूप में नहीं है। अतः हम अपने अपार पर्यावरण संसाधनों का उपयोग देश के विकास में उतना नहीं कर पा रहे हैं जितना कि करना चाहिए ।

* इसी प्रकार यदि किसी देश के पास पर्यावरणीय या प्राकृतिक संसाधन तो हों किंतु उन संसाधनों का दोहन या उपयोग करने के लिए पर्याप्त मानवी संसाधन अर्थात कुशल जनसंख्या ना हो तो वह देश अपने प्राकृतिक संसाधनों से देश के आर्थिक विकास के लिए कोई लाभदायक कदम नहीं उठा सकता।

स्पष्ट है कि किसी भी देश के आर्थिक विकास के लिए केवल प्राकृतिक संसाधनों का होना ही पर्याप्त नहीं है, अपितु उनके साथ साथ मानवीय संसाधनों अर्थात कुशल जनसंख्या का होना भी जरूरी है।

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