विश्व युद्ध क्यों?

मुलत: साम्राज्यवादी शक्तियों के बीच उपनिवेशओं की छीना झपटी, इनकी साम्राज्य लिप्सा, विस्तार वादी महत्वाकांक्षा तथा अपने उद्योग व व्यापार को संरक्षण देने की प्रवृत्ति के कारण इन यूरोपीय शक्तियों के बीच टकराव होते रहे, जिनके कारण यूरोप में तनाव बढ़ गया। यूरोप के देश अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए परस्पर विरोधी गुटों में शामिल होकर अपनी अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने लगे। यूरोप सैन्य शिविर बनकर रह गया । इस समय यानी बीसवीं शताब्दी के प्रथम दशक में दो विरोधी गुट बन गए। 1882 ईस्वी में जर्मनी, ऑस्ट्रिया, हंगरी और इटली ने मिलकर ट्रिपल एलाइंस और 1907 ईसवी में फ्रांस रूस ब्रिटेन ने त्रि-राष्ट्रीय मैत्री का निर्माण कर लिया।इन गुटों की पारस्परिक प्रतिस्पर्धा अंतर्विरोध के कारण यूरोप का वातावरण तनावग्रस्त हो गया था । इसी समय सेराजेवो से आस्ट्रिया के युवराज और उसकी पत्नी के हत्याकांड के फलस्वरूप 28 जुलाई 1914 को एक ऐसा युद्ध प्रारंभ हुआ जिसने संपूर्ण विश्व को प्रभावित किया।
1914 ईस्वी के प्रारंभ में इस युद्ध ने पूरी दुनिया को अपने प्रभाव क्षेत्र में समेट लिया। इस लड़ाई में जितनी बर्बादी हुई उतनी मानव इतिहास में पहले कभी नहीं हुई थी। वास्तव में यह सर्वव्यापी युद्ध था। इस युद्ध ने सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया। इस युद्ध में हुई भीषण बमबारी से असंख्य लोगों की जानें गई तथा धरती पर अकाल पैदा हो गया । इस युद्ध का प्रभाव अभूतपूर्व था। इसने दुनिया के इतिहास को मोड़ दिया। इसके अभूतपूर्व फैलाव और व्यापक स्वरूप के कारण ही इसे प्रथम विश्व युद्ध कहा जाता है। इस युद्ध की अवधि लगभग 4 वर्षों तक 1914 - 1918 ईस्वी की थी। युद्ध का परिणाम अत्यंत भयावह रहा।
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