प्रथम विश्व युद्ध के निम्न कारण थे-
१-साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्धा- यूरोपीय देशों ने विस्तारवाद की जो प्रक्रिया आरंभ की थी वह आगे चलकर प्रथम विश्व युद्ध का कारण बनी आरंभ में संधियों के माध्यम से उत्पन्न संघर्ष को टाला जाता रहा।
२-जर्मनी का एकीकरण व उत्थान- औद्योगिक उत्थान के बाद जर्मनी भी साम्राज्य विस्तार की दौड़ में शामिल हो गया । अन्य साम्राज्यवादी शक्तियों की भांति जर्मनी ने भी कच्चे माल की आपूर्ति व सुरक्षित बाजार की आवश्यकता के लिए एशिया व अफ्रीका के क्षेत्रों पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने का प्रयास आरंभ कर दिया जिससे रुष्ट होकर ब्रिटेन व फ्रांस ने इसका कड़ा विरोध किया । यह विरोध आगे चलकर प्रथम विश्व युद्ध का कारण बना।
३-विरोधी गुटों का उदय- साम्राज्यवाद व सीमा विस्तार की प्रवृति से यूरोप में चल रहे आपसी वैमनस्य व तनाव के कारण दो विरोधी गुटों का सृजन हुआ।अपने हितों की पूर्ति के लिए विभिन्न ने देश परस्पर विरोधी गुटों में शामिल होकर अपनी सैन्य शक्ति का विस्तार करने लगे। इस समय उग्र राष्ट्रवाद की भावना ने आग में घी का काम किया। 1882 ईस्वी में जर्मनी, ऑस्ट्रिया, हंगरी और इटली का एक नया त्रिगुट विश्व मंच पर गठित हुआ।इसके विरोध में सन 1907 में रूस, फ्रांस और ब्रिटेन के बीच एक समझौते के आधार पर दूसरा गुट भी बनकर तैयार हो गया। इन दोनों अंतर विरोधी गुटों के निर्माण से सिद्ध हो गया कि कालांतर में एक भयंकर युद्ध होकर रहेगा।