भारत के प्रयदिवपीय स्थिति के कारण मानसून की दो शाखाएं हो जाती है--
(क) अरब सागर की शाखा, (ख) बंगाल की खाड़ी की शाखा
(क) अरब सागर की शाखा--- अरब सागर की शाखा सबसे पहले पश्चिमी घाट के पर्वतों से टकरा कर सह्याद्रि के पावनाविमुख ढाल पर भारी वर्षा करती है। पश्चिमी घााट को पार करके यह शाखाा दक्कन के पठार और मध्य्य प्रदेश मैं पहुंच जाती है वहां भी इससे पर्याप्त मात्रा में वर्षा होती है तत्पश्चात का प्रवेश गंगा के मैदानों में होताा है जहां बंगाल की खाड़ी की शाखा भी आकर इस में मिल जाती है।
अरब सागर के मानसून की शाखा का दूसरा भाग सौराष्ट्र के प्रायद्वीप तथा कच्छ में पहुंच जाता है। इसके बाद यह पश्चिमी राजस्थान और अरावली पर्वत श्रेणियों के ऊपर से गुजरती है। वहां इसके द्वारा बहुत हल्की वर्षा होती है। पंजाब और हरियाणा में पहुंचकर यह भाग भी बंगाल की खाड़ी की शाखा में मिलकर हिमालय के पश्चिमी भाग में भारी वर्षा करती है।
( ख) बंगाल की खाड़ी की शाखा--- बंगाल की खाड़ी की मानसून शाखा म्यांमार तट की ओर तथा बांग्लादेश के दक्षिणी पूर्वी भागो की ओर बढ़ती है। परंतु म्यांमार तट के साथ साथ फैली अराकान पहाड़ियां इस शाखा के बहुत बड़े भाग को उपमहाद्वीप की दिशा में मोड़ देती है इस प्रकार यह पश्चिमीी दिशा से ना आकर दक्षिण तथा दक्षिण पूर्वी दिशाा से आती है। विशाल हिमालय तथा उत्ततर-पश्चिमी भारत के निम्न वायु दाब के प्रभाव से यह शाखा दो भागों में बंट जाती है एक शाखा पश्चिम की ओर बढ़ती है तथा गंगा के मैदानों को पार करती हुई पंजाब केेे मैदानों तक पहुंचती है । इसकी दूसरी शाखा ब्रह्मपुत्र की घाटी की ओर बढ़तीी है।