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11. भारत सरकार अधिनियम 1935 के अंतर्गत केंद्र में 'द्वैध शासन' एक नए अखिल भारतीय संघ की स्थापना तथा प्रांतों में द्वैध शासन व्यवस्था को समाप्त करने का प्रावधान किया गया (प्रांतों में द्वैध शासन का उपबंध 1919 के अधिनियम द्वारा किया गया था) ।
12. भारत शासन अधिनियम 1919, जिसका उद्देश्य भारतीय शासन में भारतीयों की भागीदारी को बढ़ाना था । इस अधिनियम को भारत सचिव एडविन मांटेग्यू एवं वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड के कार्यकाल में पारित किया गया था । इस अधिनियम के द्वारा राज्यों में द्वैध शासन की स्थापना की गई ऐसे प्रत्येक राज्य में राज्य के प्रशासन को दो श्रेणियों में बांटा गया-
(a)आरक्षित,
(b)हस्तांतरित ।
13. मुसलमानों के लिए प्रथक सांप्रदायिक निर्वाचन व्यवस्था का प्रावधान 1909 के अधिनियम में ही कर दिया गया था । 1919 के अधिनियम में अव्यवस्था न केवल जारी रही बल्कि से सिक्खों, यूरोपियों, भारतीयों, ईसाइयों, एवं एंग्लो इंडियन के लिए भी विस्तारित किया गया ।
14. 1919 के भारत सरकार अधिनियम द्वारा केंद्र में द्विसदनीय विधायिका की स्थापना की गई । उपरिसदन, 'राज्य परिषद' कहलाता था, जो 5 वर्ष के लिए होता था और उसके 60 सदस्यों में से 34 निर्वाचित तथा 26 मनोनीत होते थे । निचला सदन 'केंद्रीय विधानसभा' कहलाता था, जो 3 वर्ष के लिए होता था और उसके 144 सदस्यों में से 104 निर्वाचित तथा 40 मनोनीत होते थे ।