आधुनिक भारत का इतिहास Chap- 3, इंगलिश ईस्ट इन्डिया कम्पनी और बंगाल, Day-1

मुर्शिद कुली खाँ ( 1700-27 ई० )

1701 ई० में मुगल बादशाह औरंगजेब ने मुर्शिद कुली खाँ को बंगाल का सूबेदार नियुक्त किया। उसने ढाका के स्थान पर मकसूदाबाद को अपनी राजधानी बनाया और उसे एक नया मुर्शिदाबाद प्रदान किया।

* 1727 ई० में  मुर्शिद कुली खाँ की मृत्यु के बाद उसका दामाद शुजाउद्दीन  (1727-39 ई०) बंगाल का नया नवाब बना। उसने अपनी स्वतंत्रता सत्ता की स्थापना कर ली।

* 1739 ई० में शुजाउद्दीन की मृत्यु के बाद उसका पुत्र सरफराज खाँ (1740-56 ई०) शासक बना।

अली वर्दी खाँ ( 1740-56 ई० )

नवाब अली वर्दी खाँ मुगल सम्राट के अधीन बंगाल, बिहार तथा उड़ीसा तीनों प्रांतों का सूबेदार था।

* अली वर्दी खाँ ने यूरोपियों की तुलना मधुमक्खी के छत्ते से करते हुए कहा था, ' यदि उन्हें छोड़ दिया जाए, तो हमें शहद देंगे और यदि उन्हें छेड़ दिया जाए, तो वे काट-काट कर मार डालेंगे।'

सिराजुद्दौला ( 1756-57 ई० )

अली वर्दी खाँ ने अपने जीवन में ही सिराजुद्दौला को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया था, परन्तु उसका मृत्यु के बाद शौकतजंग और सिराजुद्दौला के बीच गद्दी के लिए संघर्ष हुआ।

सिराजुद्दौला के गद्दी पर बैठते ही उसके अँग्रेजों से संघर्ष प्रारंभ हो गये।

सिराजुद्दौला के विरोधी 

1- सिराजुद्दौला की मौसी           -     घसीटी बेगम 

2- पूर्णिया का नवाब                 -     शौकतजंग

3- नवाब का सेनापति               -     मीरजाफर

4- नवाब का दीवान                  -     रायदुर्लभ 

5- बंगाल के नादिया का प्रसिध्द -     जगतसेठ

6- दीवान                               -      अमीनचंद्र

* सिराजुद्दौला उस समय काफी क्रुध्द हो गया, जब उसकी अनुमति के बगैर अँग्रेजों ने कलकत्ता स्थित अपनी कोठी की किलेबंदी प्रारंभ कर दी। उसने तुरंत इसके विरुध्द अभियान हेतु कलकत्ता की ओर कूच किया।

* 4 जून, 1756 ई० को कासिम बाजार की अँग्रेज फैक्ट्री जीत ली गयी, जबकि 17 जून तक सिराजुद्दौला  के सैनिक अधिकारियों ने कलकत्ता के किले का घेरा डा दिया। तब कलकत्ता के अँग्रेज गवर्नर रेजर ड्रैक ने कुछ व्यापारियों, महिलाओं व बच्चों को लेकर हुगली नदी के नीचे के भाग में स्थित एक ज्वारग्रस्त द्वीप फुल्टा द्वीप में जाकर शरण ली।

*सिराजुद्दौला ने कलकत्ता का एक नया नाम अलीनगर रखकर उसे अपने एक प्रतिनिधि मणिकचंद्र के हाथों सौंपकर वापस मुर्शिदाबाद चला गया।

* कलकत्ता के इसी अभियान के दौरान सिराजुद्दौला के समय कालकोठरी दुर्घटना Black hole tragedy घटित हुई।

* कोठरी की लम्बाई 18 फीट जबकि चौड़ाई 14 फीट 10 इंच थी। कहा जाता है कि सिराजुद्दौला ने 146 अँग्रेजों को इस कोठरी में 20 जून को भयानक गर्मी में कैद कर दिया, जिसके कारण 21जून को इस में से 23 लोगों को छोड़ कर शेष सभी की मृत्यु हो गयी।

* बचे हुए लोगों में एक जेड० हॉलवेल भी था, जिसने कि इस घटना को इतिहास के पन्नों में जगह दिलाई।

* कलकत्ता पर पुन: अधिकार हेतु एक थल सेना कर्नल क्लाइव तथा मेजर क्लिपैट्रिक के नेतृत्व में तथा एक जल सेना एडमिरल वॉट्सन के नेतृत्व में कलकत्ता पहुँची। 

* लोगों ने मिलकर फुल्टा द्वीप के शरणार्थियों को मुक्ति प्रदान कर तथा मणिकचंद्र को घूस देकर कलकत्ता पर फिर से एक बार अधिकार कर लिया और सिराजुद्दौला को एक नई संधि करने के लिए बाध्य किया, जिसे अलीनगर की संधि कहकर पुकारा जाता है। 

9 फरवरी 1957 ई०  को हुई इस संधि के अनुसार, 

1- दस्तक का प्रयोग जारी रखने की बात की गयी।

2- कम्पनी को अपनी इच्छानुसार कलकत्ता के अपने आबादी की किलेबंदी करने और अपने सिक्कों को ढालने की अनुमति मिल गयी।

परन्तु अँग्रेजों को इस से भी संतोष नहीं था, इस लिए फिर एक नये युध्द की पृष्ठभूमि बनी, जिसे प्लासी का युध्द कहा जाता है।

Posted on by