प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की पराजय के कारण

प्रथम विश्वयुद्ध के प्रारंभ में जर्मनी की स्थिति बड़ी ही सुदृढ़ थी।उसके पास विशाल शुसंगठित सेना तथा अस्त्र शस्त्रों का पर्याप्त भंडार था। उसका सैनिक अनुशासन उच्च कोटि का था। उसके पास रसद की कमी नहीं थी फिर भी जर्मनी को अन्तत: पराजित होना पड़ा। उसकी इस पराजय के निम्न कारण थे-
-युद्ध का लंबा हो जाना जर्मनी के लिए घातक हुआ ।जर्मनी ने सोचा था कि 1-2 मास में वह मित्र राष्ट्रों को पराजित कर देगा, किंतु ऐसा नहीं हो सका ।युद्ध 4 वर्षों तक चलता रहा, जिससे जर्मनी के साधनों में कमी आ गई और उसे पराजय स्वीकार करनी पड़ी।
-संयुक्त राज्य अमेरिका के सम्मिलित हो जाने से मित्र राष्ट्रों को बल मिला और जर्मनी की पराजय सुनिश्चित हो गई।
-इंग्लैंड की नाविक शक्ति विश्व में सर्वश्रेष्ठ थी। उनके जंगी जहाजों के समक्ष जर्मनी के जहाज कुछ भी नहीं थे ।अत: अंग्रेजों के जहाजों ने जर्मनी के जहाजों को चारों ओर से घेर लिया।
-मित्र राष्ट्रों के पास जर्मनी की अपेक्षा जनधन की शक्ति अधिक थी जिसके कारण जर्मनी की पराजय हुई।
-जर्मनी के सेनापति और राजनीतिज्ञ मित्र राष्ट्रों की शक्ति का सही अनुमान नहीं कर सके थे।
-रूस की साम्यवादी क्रांति का प्रभाव भी इस युद्ध पर पड़ा, क्योंकि 1917 ईसवी की क्रांति से रूस ने इस युद्ध से अपने को अलग कर लिया।
इन्हीं समस्त कारणों से जर्मनी की पराजय हुई।
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