नीति निदेशक तत्वों की महत्ता-

 भारतीय संविधान के निर्माण के समय ही नीति निदेशक तत्वों की कतिपय आधारों पर आलोचना की गई थी।

 -राज्य नीति के निदेशक तत्वों को एक ओर तो देश के शासन में मूलभूत माना गया है किंतु दूसरी ओर वे वैधानिक शक्ति प्राप्ति न्याय योग्य नहीं हैं दूसरे शब्दों में इन न्यायालय के तत्वोों को क्रियान्वित नहीं कर सकता  हैं ।

यही कारण है कि संविधान सभा के सदस्य प्रोफेसर  नसीरुद्दीन ने कहा था कि नए वर्ष के प्रथम दिन पास कििये गए  शुभकामना प्रस्ताव हैं  जिस्की अवहेलना दूसरे दिन से ही प्रारंभ की जाती है इसी प्रकार प्रो के टी शाह के शब्दों में यह एक ऐसा चेक है जिसका भुगतान बैंक की इच्छा पर छोड़ दिया जाता है आलोचकों का मानना है कि निदेशक तत्वों में ऐसे काल्पनिक आदर्शों की रूपरेखा  प्रस्तुत की गई है जिन्हें क्रिया क्रियान्वित करना दूर की काउड़ीी सिद्ध होगी  निदेशक सिद्धांतों द्वारा जनता को शासन के मूल्यांकन की महान शक्ति प्राप्त होती है साथ ही यह न्यायालयों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत भी हैं ज्ञातव्य है कि न्यायालयों ने मूल अधिकारों से संबंधित मीणा देते समय अनेक बार नीति निदेशक तत्वों से मार्गदर्शन लिया है किंतु मूल अधिकार पर निदेशक सिद्धांतों को कभी वरीयता नहीं दी है।

एमसी सीतलवाड़ के शब्दों में राजनीति के इन मूलभूत सिद्धांतों को वैधानिक प्रभाव प्राप्त ना होते हुए भी उनके द्वारा न्यायालयों के लिए उपयोगी प्रकाश स्तंभ का कार्य किया जाता है।

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