राष्ट्रपति शासन भाग 2

राष्ट्रपति शासन के उद्घोषणा के प्रकार - राष्ट्रपति उद्घोषणा करेगा कि राज्य की समस्त विधायिका शक्तियों का प्रयोग संसद के द्वारा किया जा सकेगा तथा संसद इस शक्ति को राष्ट्रपति को प्रदान कर सकती है तथा उसे या शक्ति प्रदान कर सकती है कि वह इसे किसी भी अन्य प्राधिकारी को सौंप दें। 

- मुख्यमंत्री सहित राज्य की मंत्रिपरिषद को विघटित कर दिया जाएगा। 

- उच्च न्यायालय को छोड़कर राज्य की शक्तियों को केंद्र के द्वारा हस्तगत किया जा सकता है। 

- राज्य सूची के विषयों पर केंद्र के द्वारा विधि निर्माण भी किया जा सकता है। 

- राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा के समय ही राज्य की विधानसभा निलंबित हो जाएगी अर्थात राष्ट्रपति शासन के दौरान विधानसभा का विघटन होना कोई आवश्यक शर्त नहीं है। 

राष्ट्रपति शासन की समाप्ति - उद्घोषणा वापस लेने पर अथवा 3 वर्ष का समय बीत जाने पर राष्ट्रपति शासन को समाप्त किया जा सकता है। 

राष्ट्रपति शासन का व्यवहार में प्रयोग - राष्ट्रपति शासन का सर्वप्रथम प्रयोग 1951 में पंजाब में किया गया इसका सबसे लंबा कार्यकाल 5 वर्ष पंजाब में चला। राष्ट्रपति शासन का सर्वाधिक बार प्रयोग उत्तर प्रदेश में किया गया (10 बार)। 

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन पहली बार 25 फरवरी 1968 से 26 फरवरी 1969 तक चला तथा अंतिम बार 8 मार्च 2002 से 3 मई 2002 तक चला। 

 छत्तीसगढ़ तथा तेलंगना भारत के ऐसे राज्य हैं जहां पर अभी तक राष्ट्रपति शासन एक बार भी लागू नहीं हुआ है। 

संविधान सभा में डॉ भीमराव अंबेडकर ने अनुच्छेद 356 की उग्र शक्ति को मृत पत्र की संज्ञा दी थी तथा उनके अनुसार इसका प्रयोग राज्यों में अंतिम विकल्प के रूप में किया जाना चाहिए ऐसा कहा गया था। 

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