इसरो के द्वारा हाल ही में चंद्रयान 2 के प्रक्षेपण की तारीख और समय की घोषणा करते हुए यह बताया गया है कि चंद्रयान 2 का प्रक्षेपण 15 जुलाई को सुबह किया जाएगा। जिसको जीएसएलवी मार्क 3 रॉकेट 15 मिनट में आर्बिटल को पृथ्वी की ध्रुवीय कक्षा में स्थापित कर देगा। इसरो के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यह बताया गया है कि चंद्रयान-2 चंद्रमा पर 6 सितंबर को दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा यह दूसरा चंद्र अभियान है जिसमें तीन मॉड्यूल है -
आर्बिटर : चंद्रयान - 2 आर्बिटर चांद से लगभग 100 किलोमीटर ऊपर स्थापित किया जाएगा जो चक्कर लगाते हुए लैंडर और सोबर से प्राप्त जानकारी को इसरो सेंटर पर भेजेगा। और साथ ही साथ शुरू से भेजे गए कमांड को लैंडर तथा रोवर तक पहुंचाएगा। चंद्रयान-2 में 8 पेलोड हैं।
लैंडर : भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर इसरो द्वारा लेंडर का नाम विक्रम रखा गया है जिसमें चार पेलोड हैं जो 15 दिनों तक वैज्ञानिक प्रयोग करेगा और इसकी शुरुआती डिजाइन इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद के द्वारा बनाया गया है जिसे बाद में बेंगलूर के यू आर एस सी के द्वारा विकसित किया गया है।
रोवर : यह एक 27 किलोग्राम वजन का एक रोबोट है जिसमें दो पेलोड हैं और इस रोबोट पर ही पूरे मिशन की जिम्मेदारी होगी। यह चांद की सतह पर लगभग 400 मीटर की दूरी तय करेगा और विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोग करेगा और वहां से प्राप्त सभी जानकारी को विक्रम लैंडर को भेजेगा और फिर लैंडर के द्वारा सारी जानकारी का डाटा आर्बिट को भेजा जाएगा और फिर आर्बिट उसे इसरो सेंटर पर भेज देगा। रोबोट से भेजी गई जानकारी को इसरो सेंटर तक पहुंचने में लगभग 15 मिनट का समय लगेगा अर्थात यह पूरी प्रक्रिया 15 मिनट में पूर्ण होगी।
चंद्रयान-2 को लॉन्च करने में 800 करोड़ों रुपए की लागत लगी है। इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड के द्वारा तैयार करके 2015 में ही इसरो को दे दिया गया था।
इसमें एक भी पेलोड विदेशी नहीं लगाया गया है।
भारत ने चंद्रयान-1 को 22 अक्टूबर 2008 को लांच किया था जिसमें आर्बिट में तीन यूरोप और 2 अमेरिका के पेलोड्स का इस्तेमाल किया गया था।