मणिपुर राज्य पीपुल्स विधेयक 2018 - यह विधेयक भारत के मणिपुर राज्य के सरकार का नागरिक संशोधन विधेयक है मणिपुर सरकार ने यह निर्णय लिया है, कि वह भारत सरकार के नागरिकता संशोधन विधेयक , 2016 का विरोध करेगी। क्योंकि इसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र के मूल निवासियों विशेषकर मणिपुर के मूल निवासियों को सुरक्षित करने के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। इस संदर्भ में मणिपुर राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि मणिपुर लोक सुरक्षा विधेयक , 2018 पर राष्ट्रपति का अनुमोदन प्राप्त किया जाए। जिससे राज्य के लोगों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। विधेयक से संबंधित मुख्य तथ्य : ब्रिटिश शासन काल में पूर्वोत्तर के 3 राज्यों अरुणाचल प्रदेश , मिजोरम और नागालैंड में लोगों के आवागमन को नियंत्रित करने के लिए एक ब्रिटिश इनर लाइन परमिट प्रणाली बनाई गई थी। यह विधेयक उसी प्रणाली का अनुसरण करते हुए मणिपुर में बाहरी लोगों के आवागमन को नियंत्रित करने हेतु लाया गया है। इस विधेयक में स्थानीय लोगों को परिभाषित करने के लिए तथा बाहरी लोगों के आगमन को रोकने के लिए वर्ष 1951 को आधार वर्ष के रूप में चयन किया गया है। मणिपुर पीपुल्स प्रोटेक्शन विधेयक के अनुसार मणिपुर लोगों में मौतियों ,पंगल मुस्लिमों संविधान में वर्णित अनुसूचित जनजातियों के साथ - साथ उन सभी भारतीय नागरिकों को सम्मिलित किया गया है। जो मणिपुर में वर्ष 1951 के पहले से रह रहे हैं । विधेयक में किस अन्य सभी लोगों को गैर मणिपुरी बताया गया है। जिनको कानून की अधिसूचना के 1 महीने के अंदर अपने आप को पंजीकृत करवाना होगा । इन लोगों को सरकार एक पास देगी जो अधिकतम 6 महीने के लिए होगा। मणिपुर की यात्रा करने वाले किसी भी बाहरी आदमी को एक पास लेना जरूरी होगा। विधेयक के अधिनियम बन जाने के पश्चात 1951 के बाद मणिपुर में आने वाले लोगों को विदेशी माना जाएगा और उन्हें मताधिकार एवं भूमि अधिकार नहीं होगा ।