भारत में होने वाली अधिकांश वर्षा ग्रीष्मकालीन मानसूनों का विशिष्ट योगदान होता है। भारतीय वर्षा की विशेषताएं निम्नलिखित है --
(1) मानसूनी वर्षा --- भारतीय वर्षा का लगभग 75% भाग दक्षिण-पश्चिम मॉनसून द्वारा प्राप्त होता है, अर्थात कुल वार्षिक वर्षा का 75% वर्षा ऋतु में प्रतिशत में 10% बसंत ऋतु में तथा 2% शरद ऋतु में प्राप्त होता है।
(2) वर्षा की अनिश्चितता--- भारतीय मानसूनी वर्षा कब प्रारंभ अनिश्चित है। मानसून कभी शीघ्र आते हैं तो कभी देर से। कभी वर्षा ऋतु में सूखा पड़ जाता है कथा कभी अत्यधिक वर्षा से बाढ़ें आती है। किसी वर्ष वर्षा नियत समय से पूर्व ही आरंभ हो जाती है एवं निश्चित समय से पूर्व ही समाप्त हो जाती है जिससे खरीफ की फसल को हानि उठानी पड़ती है तथा रबी की फसल को बोलने में कठिनाई हो जाती है।
(3) मूसलाधार वर्षा--- भारत में वर्षा अनवरत गति से नहीं होती वरन कुछ दिनों के अंतराल से होती है। कुुछ दिनों तक वर्षाा होने के बाद मौसम सूखा रहता है । मानसून के इस घटते बढ़ते स्वरूप का कारण चक्रवाती अवदाब है, जो मुख्यत: बंगाल की खाड़ी में पैदा होते हैं तथाा गंगाा घाटी की ओर बढ़ते हैं। कभी-कभी मूसलाधार रूप में होती है और एक ही दिन में 50 सेंटीमीटर तक वर्षा हो जाती है तब यह मिट्टी का अपरदन करती है जिससे मिट्टी का उत्पादक तत्व पाए जाते हैं ।