वर्साय की संधि (28 जून 1919 ईस्वी)

मित्र राष्ट्रों द्वारा युद्ध की धमकी देकर जर्मनी की गणतांत्रिक सरकार को इस संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य कर दिया गया, संधि में जर्मनी और उसके सहयोगियों को आक्रमण का दोषी ठहराया गया।
 वर्साय की संधि की प्रमुख शर्ते निम्न वत हैं-
-जर्मनी की इच्छा के विरुद्ध फ्रांस को अल्सास लोरेन वापस दे दिया गया।
-सार नामक जर्मनी की कोयला खदानें 15 वर्षों के लिए फ्रांस को दे दी गई।
- जर्मनी को युद्ध पूर्व के अपने क्षेत्र का कुछ भाग भी बाध्य होकर देना पड़ा।
- राइन नदी की घाटी के क्षेत्र को सेना रहित क्षेत्र घोषित किया गया।
- जर्मनी को एक लाख से अधिक सेना रखने पर प्रतिबंध लगा दिया गया तथा वायु सेना और पनडुब्बियों रखने का अधिकार भी छीन लिया गया।
- जर्मनी के उपनिवेशों को भी मित्र राष्ट्रों ने आपस में बांट लिया तथा युद्ध के हर्जाने के रूप में 650 करोड़ की भारी धनराशि निश्चित की गई।
इस प्रकार वर्साय की संधि की कठोर शर्तों ने जर्मन जनता के हृदय में मित्र राष्ट्रों के प्रति घृणा का भाव भर दिया। कालांतर में वर्साय की संधि ने द्वितीय विश्व युद्ध को जन्म दिया, क्योंकि-
- यह संधि आपस में अपमानजनक थी, और जबरदस्ती थोपी गई थी ।
- यह संधि बदले की भावना से की गई थी। -संधि की शर्तें अत्यंत कठोर थी । 
-संधि में एक पक्षीय निर्णय लिया गया था। -इस संधि एक विद्वान के शब्दों मे "संपूर्ण व्यवस्था ने यूरोप को बाल्कान की रियासतों के समान बना दिया था"। जर्मनी राज्य को भंग कर उसे छोटे-छोटे राज्यों में बांट दिया गया था।
 अतः इस संधि के फलस्वरूप यूरोप की शक्ति का संतुलन ऊपर से नीचे हो गया।
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