क्रमशः..
Day - 36
- प्रस्तावना निम्नलिखित महत्वपूर्ण उद्देश्यों की पूर्ति करती है –
- संविधान का स्रोत क्या है, अर्थात् ‘भारत के लोग’।
- संविधान का उद्देश्य क्या है, अर्थात इसमें उन महान अधिकारों तथा स्वतंत्रताओं का उल्लेख किया गया है जिन्हें भारत के लोगों ने सभी नागरिकों के लिए सुनिश्चित बनाने की इच्छा की थी।
- इसमें संविधान के प्रवर्तन की तिथि का उल्लेख है।
- संविधान की प्रस्तावना के अनुसार भारत को एक प्रभुत्व सम्पन्न, लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी गणराज्य बनाने का निश्चय किया गया है।
- भारतीय संविधान की प्रस्तावना का आधार पं. नेहरु द्वारा प्रस्तुत उद्देश्य प्रस्ताव है।
- प्रस्तावना संविधान का एक भाग है लेकिन वह न्याय योग्य नहीं है।
- प्रस्तावना में प्रयुक्त गणतंत्र शब्द का तात्पर्य है कि भारत का राष्ट्राध्यक्ष वंशानुगत नहीं होगा।
- प्रस्तावना में प्रयुक्त ‘प्रभुत्वसम्पन्न’ शब्द का तात्पर्य है कि भारत आन्तरिक या बाह्य दोनों ही दृष्टि से किसी विदेशी सत्ता के अधीन नहीं बल्कि प्रभुत्व सम्पन्नता भारत की जनता में निहित है।
- प्रस्तावना का उद्देश्य लोगों को सामाजिक, आर्थिक तथा राजनैतिक न्याय, विचार, मत, विश्वास तथा धर्म की स्वतंत्रता, पद एवं अवसर की समानता, व्यक्ति की गरिमा तथा राष्ट्र की एकता के लिए बन्धुत्व को प्रदान करना है।
- प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है और यह संविधान के अस्पष्ट उपबन्धों को समझने में सहायता प्रदान करती है।
- प्रस्तावना संविधान का भाग है। अतः संसद इसमें अनुच्छेद 368 के अन्तर्गत संशोधन कर सकती है, किन्तु प्रस्तावना के उस भाग में संशोधन नहीं किया जा सकता है जो ‘आधारभूत ढांचे’ से सम्बंधित है।
जारी..
मिलते है हम अगले दिन, भारतीय संविधान की प्रस्तावना या उद्देशिका विषय पर फिर आगे चर्चा करने के लिये..