प्रथम विश्व युद्ध प्राचीन काल के समय लड़े जाने वाले आमने-सामने युद्ध से सर्वथा भिन्न था। इस युद्ध में ऐसे वैज्ञानिक तथा विनाशकारी अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग हुआ जिसके कारण इस युद्ध को मशीनों का युद्ध या यांत्रिकी युद्ध कहा जाता है। यज्ञ प्रथम विश्व युद्ध में भी आधुनिक यंत्रों का प्रयोग किया गया था किंतु द्वितीय विश्व युद्ध तक का युद्ध कला का इतने व्यापक रूप से यंत्रीकरण किया जा चुका था की प्रथम विश्व युद्ध इस युद्ध की तुलना में कुछ भी ना रहा। अतः दूसरे विश्व युद्ध में विजय उसी को प्राप्त हो सकने की संभावना थी जो अत्यधिक मात्रा में संघार कारी और विद्युत गति परिचालित यंत्रों का प्रयोग कर सकें। हिटलर ने युद्ध आरंभ होने से पूर्व ही यांत्रिक अस्त्र शस्त्रों का संग्रह प्रचुर मात्रा में कर लिया था। इस यांत्रिक अस्त्र शस्त्रों के अजय शक्ति का भरोसा करके हिटलर ने युद्ध की ज्वाला को प्रचंड किया था। हिटलर की यह यंत्री कृत रणनीति वज्र युद्ध के नाम से जानी जाती थी। इसी वज्रयुद्ध के आधार पर ही जर्मन सेना को आरंभ में आश्चर्यजनक सफलता प्राप्त हुई। जर्मन सेना ने विद्युत गति से शत्रुओं पर हमला बोल कर उन्हें पराजित करने में सफलता प्राप्त की परंतु धीरे-धीरे मित्र राष्ट्रों ने भी यही रणनीति अपनाई और जर्मन सेनाओं के मार्ग में अवरोध उत्पन्न करना आरंभ कर दिया। धीरे धीरे मित्र राष्ट्रों के वज्र प्रहर की गति प्रणाम और संख्या में वृद्धि होती गई। मित्र राष्ट्रों के आक्रमणों ने जर्मनी की विशाल सेना बड़े-बड़े कल कारखानों और यातायात के साधनों पर संघार कारी शस्त्रों की वर्षा करके उन्हें नष्ट भ्रष्ट कर दिया।