लीग ऑव नेशंस की सदस्यता तथा उसके प्रमुख अंग

आरंभ में वुडरो विल्सन के प्रस्ताव के आधार पर सहमत होते हुए 42 राष्ट्रों ने इसकी सदस्यता ग्रहण की थी, किंतु धीरे-धीरे कतिपय अन्य देश भी इसमें शामिल होते गए और यह संख्या 60 तक पहुंच गई। 1926 ईस्वी में जर्मनी और 1934 में रूस को इसकी सदस्यता प्रदान की गई।
लीग ऑव नेशंस एक अंतरराष्ट्रीय संघ था। कोई भी राष्ट्र तभी इसका सदस्य बन सकता था जबकि उस देश की कम से कम एक तिहाई जनसंख्या सदस्यता प्राप्त करने के पक्ष में अपना मत प्रस्तुत करें।
किसी भी सदस्य राष्ट्र को इस संघ से अलग होने के लिए पूर्व सूचना देना आवश्यक था। इस संघ की स्थापना अमेरिका के राष्ट्रपति वुडरो विल्सन के सतत प्रयासों का परिणाम है, किंतु इसका जन्मदाता अमेरिका अमेरिकी सीनेट के विरोध के कारण संघ का सदस्य नहीं बन सका। अमेरिका का सदस्य न बनना ही  कालांतर में इसकी असफलता का कारण बना।
 लीग ऑव नेशंस के प्रमुख अंग- 
लीग ऑफ नेशंस के पांच प्रमुख अंग निम्नवत् हैं-
-साधारण सभा 
-परिषद 
-सचिवालय 
-अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय 
-अंतर्राष्ट्रीय श्रम संघ

१- साधारण सभा:- साधारण सभा में लीग ऑव नेशंस के सभी सदस्य सम्मिलित होते थे ।इस सभा का अधिवेशन प्रत्येक वर्ष सितंबर में जेनेवा में होता था। प्रत्येक सदस्य राष्ट्र इसमें अपने 3 प्रतिनिधि प्रतिभाग करने के लिए भेज सकता था, किंतु मत देने का अधिकार प्रत्येक सदस्य राष्ट्र की एक ही प्रतिनिधि को होता था।

प्रमुख कार्य- 
-लीग आव नेशंस के बजट को स्वीकार करना।
-अंतरराष्ट्रीय न्यायाधीशों का चयन करना। -नए राष्ट्रों को लीग ऑव नेशंस की सदस्यता प्रदान करना आदि।

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