विधायी शक्ति - संसद का मुख्य कार्य विधि का निर्माण करना है तथा संसद संघ सूची तथा समवर्ती सूची अवशिष्ट विषय तथा विशिष्ट परिस्थितियों में राज्य सूची के विषयों पर भी विधि निर्माण कर सकती है कानून निर्माण संबंधी कोई भी साधारण विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तावित किया जा सकता है।
कार्यपालिका शक्ति - मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से केवल लोकसभा के प्रति उत्तरदाई होती है तथा मंत्री परिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता है अर्थात लोकसभा कार्यपालिका पर प्रभावशाली नियंत्रण रखती है।
वित्तीय शक्ति - अनुच्छेद 109 के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है कि समस्त वित्तीय संबंधी विधेयक लोकसभा में ही प्रस्तावित किया जाएगा धन विधेयक तथा बजट आदि भी लोकसभा में ही रखे जाते हैं।
संविधान संशोधन की शक्ति - अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान में संशोधन की शक्ति संसद में निहित है तथा संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तावित किया जा सकता है।
अन्य शक्तियां - राष्ट्रपति का निर्वाचन , उपराष्ट्रपति का निर्वाचन, राष्ट्रपति पर महाभियोग , अध्यादेश का अनुमोदन, आपातकाल का अनुमोदन, उच्चतम तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को पद से हटाना आदि मैं लोकसभा तथा राज्यसभा की शक्तियां समान है।
विशिष्ट शक्तियां - संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष के द्वारा की जाती है तथा उसकी अनुपस्थिति में लोकसभा के उपाध्यक्ष के द्वारा की जाती है।
धन विधेयक का निर्धारण लोकसभा अध्यक्ष के द्वारा किया जाता है।
राष्ट्रीय आपात की समाप्ति लोकसभा के द्वारा की जा सकती है।