आपात उपबन्ध-

आपात उपबन्ध-

भारतीय संविधान में तीन प्रकार के आपात काल की व्यवस्था की गर्ई है-

1- राष्ट्रीय आपात – अनुच्छेद-352

2- राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद – 356

3- वित्तीय आपात –अनुच्छेद 360

राष्ट्रीय आपात काल- अनुच्छेद – 352- घोषणा राष्ट्रपति द्वारा।

घोषणा का आधार –युद्ध, वाह्य आक्रमण एवं सशस्त्रविद्रोह।

-मूल संविधान में सशस्त्र विद्रोह का प्रयोग नहीं था. 44 वें संविधान के द्वारा 1978 में आन्तरिक अशांति शब्द के स्थान पर किया गया।

-राष्ट्रपति के द्वारा राष्ट्रीय आपात काल की घोषणा कैबिनेट की मंत्रिमण्डल की लिखित सिफारिश पर की जाएगी यह प्रावधान 44वें संशोधन के द्वारा किया गया।

  • राष्ट्रपति आपात काल की अवधि 6 माह है इसकी अधिकतर समय सीमा निर्धारित नहीं। प्रत्येक 6 माह के पश्चात संसद के द्वारा अलग- अलग विशिष्ट बहुमत से इसका अनुमोदन किया जाना आवश्यक है।
  • वापसी तब होगी जब वापसी के प्रस्ताव पर लोकसभा के 1/10 सदस्यों का हस्ताक्षर हो तथा लोकसभा के द्वारा साधारण बहुमत से इसे पारित किया गया हो।

राष्ट्रीय प्रभाव- राष्ट्रपति के द्वारा अनुच्छेद 20, 21 को छोड़कर सभी मूलाधिकारों को निलंबित किया जा सकता है तथा अनुच्छेद -19 के द्वारा प्रदान  की गई स्वतंत्राएं स्वतः निलंबति हो जाती है।

-संसद के द्वारा संकल्प प्रस्ताव पारित करके लोकसभा एवं विधानसभा के कार्य काल को 1 बार में 1वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है।

-संघ की संसद को राज्य सूची के विषय पर भी कानून निर्माण का अधिकार प्राप्त हो जाता है।
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