आपात उपबन्ध-1

अनुच्छेद – 356-राष्ट्रपति शासन का प्रावधान है-

-घोषणा राष्ट्रपति द्वारा केन्द्रीय मंत्रिमण्डल की सलाह पर - राज्य का राज्यपाल संवैधानिक तंत्र की विफलता की रिर्पोट राष्ट्रपति को प्रेषित करता है। परन्तु राष्ट्रपति स्वतः समाधान के आधार पर राज्यपाल की रिर्पोट के बिना ही राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है।

- घोषणा से दो माह के भीतर संसद के द्वारा अलग-अलग साधारण बहुमत के किया जाना आश्वयक है।

-अवधि 6 माह, सामान्यतः इसी अवधि 2 वर्ष होगी।

अधिकतम अवधि- 3 वर्ष।

-वापसी – राष्ट्रपति के द्वारा सामान्य घोषणा करके इसे वापस लिया जा सकता है।

-प्रभाव राज्यपाल केन्द्र के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है। विधानसभा को भंग अथवा निलंबित किया जा सकता है।

अनुच्छेद – 360- वित्तीय आपात-

  • वित्तीय आपात काल का प्रावधान जिसकी प्रेरणा अमेरिका के संविधान के प्रेरित है।
  • घोषणा – राष्ट्रपति द्वारा सामान्यतः केन्द्रीय मंत्रि परिषद की सलाह पर आधार –आर्थिक स्थायित्व एवं साख को खतरा।
  • घोषणा से दो माह के भीतर साधारण बहुमत से इसका अनुमोदन किया जाना अनिवार्य है। अन्यथा घोषणा निष्प्रभावी हो जाएगी अधिकतम समय सीमा निर्धारित नहीं। और नहीं अनुच्छेद 352 राष्ट्रपति आपातकाल के समान प्रत्येक 6 माह पर इसका अनुमोदन किया जाना आवश्यक है।
  • वापसी- राष्ट्रपति सामान्य घोषणा करकें इसे वापस ले सकता है।
प्रभाव  - उच्च एवं उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों सहित सभी महत्वपूर्ण संवैधानिक पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा अधिकारियों के वेतन- भत्ते में कटौती की जा स कती है।
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