1939 ईस्वी से प्रारंभ होकर 1945 ईस्वी तक लगातार जो भयंकर विश्व युद्ध हुआ वह विश्व इतिहास का सबसे बड़ा विनाशक युद्ध था। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद विजेता राष्ट्रों द्वारा पराजित राष्ट्रों को जिस प्रकार अपमानित किया गया उसी के प्रतिक्रिया स्वरूप संसार को एक और महायुद्ध की विनाशलीला देखने को मिली।यद्यपि प्रथम विश्व युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय शांति की स्थापना के लिए विभिन्न प्रयास किए गए किंतु वे सर्वथा असफल सिद्ध हुए।
पेरिस शांति सम्मेलन में फ्रांस और इंग्लैंड ने बदले की भावना से जर्मनी को वर्साय की कठोर संधि को स्वीकार करने के लिए बाध्य कर दिया। वर्साय की संधि वास्तव में संधि नहीं बल्कि प्रतिशोध का दस्तावेज था। कालांतर में विलक्षण प्रतिभा के धनी हिटलर न केवल जर्मनी को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाया,वरन अपने देश के अपमान का बदला लेने हेतु अधिकृत वर्साय की संधि को अस्वीकृत करते हुए द्वितीय विश्व युद्ध को प्रारंभ कर दिया।
फांस का यह कथन "वर्साय संधि पत्र वास्तविक शांति न होकर 20 वर्षों का एक विराम काल था" सत्य सिद्ध हुआ।
प्रथम विश्व युद्ध के परिणाम स्वरूप दुनिया भर में परिवर्तन हुए जिनके कारण यूरोप में कई ऐसी घटनाएं घटित हुई जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के लिए उपयुक्त वातावरण बनाया।इस समय की सबसे महत्वपूर्ण घटना जर्मनी और इटली में नाजीवाद और फासीवाद की विजय थी।इस विजय ने द्वितीय विश्व युद्ध के बन्द द्वार को खोल दिया। द्वितीय विश्व युद्ध 1 सितंबर 1939 ईस्वी से 7 मई 1945 ईस्वी तक चला।