गायों और गोवंश की सुरक्षा एवं विकास के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय कामधेनु आयोग की स्थापना से संबंधित प्रस्ताव का अनुमोदन किया है।
इस योजना के अंतर्गत गठित किए गए आयोग का मुख्य कार्य गायों के प्रजनन उनके पालन, जैविक खाद , बायोगैस जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान के कार्य में लगे हुए संस्थानों से मिलजुल कर अपने कार्यों का अच्छी तरीके से निष्पादन करना है।
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग निम्न संस्थानों के साथ कार्य करेगी
-पशुपालन विश्वविद्यालयों
-पशु विज्ञान विश्वविद्यालय
-कृषि विश्वविद्यालय
-केंद्र सरकार और राज्य सरकार के संबंधित विभागों अथवा संगठनों
हाल ही में प्रस्तुत किए गए अंतरिम बजट में राष्ट्रीय गोकुल मिशन को भारत सरकार के द्वारा 750 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग की मुख्य आवश्यकता ऐसे अनेक कार्यों को करना है जिससे देश में गाय तथा गोवंश का संरक्षण किया जा सके उनको सुरक्षित किया जा सके तथा उनका समुचित विकास किया जा सके।
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के माध्यम से भारत में यहां की देसी प्रजाति की गायों के विकास और संरक्षण कार्य में सहायता मिलेगी।
इस योजना से यह आशा लगाया जा रहा है कि आयोग के कार्यों से गोवंश क्षेत्र ज्यादा से ज्यादा विकसित होगा जिसका लाभ अंतत: ग्रामीण महिलाओं और छोटे तथा सीमांत किसानों को मिलेगा।
गोवंश के अनुवांशिक उत्क्रमण और उनकी उत्पादकता की वृद्धि से संबंधित वैज्ञानिक गतिविधियों को राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के द्वारा संपादित किया जाएगा।
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग देश में चल रहे गौ संरक्षण एवं विकास से संबंधित कार्यक्रमों के लिए एक नीतिगत ढांचा को तैयार करेगा और साथ ही साथ आवश्यक दिशा-निर्देश समय-समय पर जारी करेगा जिससे गो कल्याण से जुड़े कानून सही ढंग से लागू किए जा सकेंगे और गोवंश तथा गायों की सुरक्षा एवं विकास भी किया जा सकेगा।