काशी विश्वनाथ गलियारा परियोजना

काशी विश्वनाथ गलियारा परियोजना का शिलान्यास हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया है जिसका मुख्य उद्देश्य पवित्र विश्वनाथ मंदिर और मंदिर के आसपास के क्षेत्र का विकास करना तथा उसका कायाकल्प करना है। 
विश्वनाथ मंदिर का अंतिम बार 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने  पुनरुद्धार किया था उसके बाद मंदिर का जीर्णोद्धार होने जा रहा है और साथ ही आसपास के क्षेत्र का भी विकास किया जाएगा। 

गलियारा परियोजना के अंतर्गत एक 400 मीटर लंबा और 50 फुट का गलियारा बनाया जाएगा जो विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर को गंगा के मणिकर्णिका और ललिता घाटों से सीधा आपस में जोडे़गा। और साथ ही साथ वाराणसी के प्राचीन इतिहास तथा संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए गलियारे के बीच में ही एक संग्रहालय का निर्माण किया जाएगा जो मुख्य आकर्षण का केंद्र होगा। 

भारतीय संस्कृति को संरक्षित करने तथा पवित्र स्थानों को बढ़ावा देने के क्रम में यह एक पहल की जा रही है जिससे आने वाले समय में काशी विश्वनाथ मंदिर का एक नया रूप सामने आएगा। और मंदिर के साथ ही साथ इसके समीपवर्ती क्षेत्रों में भी कार्य किया जाएगा जिससे मंदिर और आसपास के क्षेत्रों का समुचित विकास होगा। 

काशी विश्वनाथ मंदिर गंगा नदी के पश्चिमी तट पर अवस्थित है जो भगवान शिव को समर्पित विख्यात हिंदू मंदिरों में से एक सुप्रसिद्ध एवं विख्यात मंदिर है काशी विश्वनाथ मंदिर की गणना भगवान शिव के पवित्रतम 12 ज्योतिर्लिंगों में की जाती है। 

इस परियोजना के मद्देनजर गलियारे के इलाके में स्थित 80 फीसदी इमारतों को पंजीकृत कर लिया गया है। इलाके की 270 इमारतों व घरों में से 210 ने मंदिर ट्रस्ट के पक्ष में पंजीकरण कराया है और वर्तमान में 140 घरों को ढहाने का कार्य जारी है।

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