तितानवाला म्यूजियम की स्थापना

केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के द्वारा बगरू में हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग के तितानवाला म्यूजियम का उद्घाटन किया गया है। इस म्यूजियम में बड़ी संख्या में पारंपरिक वुडन ब्लॉक कपड़ों की रंगाई व छपाई के काम आने वाले बर्तन व सहायक उपकरण तथा छिपा समुदाय के इतिहास को दर्शाने वाले पुराने फोटोग्राफ को प्रदर्शित किया जाएगा जिसके माध्यम से जन समुदाय तक इसकी जानकारी तथा इसके इतिहास को बताया जाएगा। 

छीपा समाज 

छीपा एक नेपाली भाषा का शब्द है जो 2 शब्दों छी और पा से मिलकर बना है जिसमें छी का अर्थ डाई करना एवं पा का अर्थ धूप में सुखा ना होता है। छीपा समाज के लोग भारत के पुरातन बुनकर समाज से संबंधित लोग थे इस समुदाय के लोग काफी लंबे समय से राजस्थान में ब्लॉक प्रिंटिंग का कार्य करते हैं इस प्रिंटिंग के लोकप्रिय होने का मुख्य कारण इनके ब्लॉक्स पर मिलने वाली बारीक कारीगरी है जो इस कला को आकर्षक तथा विश्व प्रसिद्ध बनाती है। 

बगरू की ब्लॉक प्रिंटिंग की मुख्य विशेषता

यह ब्लॉक प्रिंटिंग बगरू नामक स्थान की ब्लॉक प्रिंटिंग है जो प्राकृतिक रंगों के साथ ब्लॉक प्रिंटिंग पारंपरिक तकनीकों में से एक है इस तकनीक का मुख्य श्रेय राजस्थान के छीपा समुदाय को जाता है जो पिछले कई वर्षों से इस तकनीक से जुड़े हुए हैं। इसमें पहले डाई किया जाता है और बाद में इसको सुखाया जाता है। 

बगरू की ब्लॉक प्रिंटिंग हाथ से की जाने वाली एक ब्लॉक प्रिंटिंग है जिसका इतिहास 1000 वर्षों से भी ज्यादा पुराना है। 

इस ब्लॉक प्रिंटिंग तकनीक में पहले कपड़े को मुल्तानी मिट्टी से धोया जाता है और उसके बाद इसे हल्दी के पानी में भिगोकर रखा जाता है ताकि यह पीला रंग प्रदर्शित करें। 

इसके बाद डाई किए गए इन कपड़ों पर विभिन्न प्रकार के ब्लॉक्स में छपाई की जाती है और यह सारा काम हाथ से किया जाता है ना किसी मशीन के द्वारा। 

इस तकनीक में डिजाइन को प्रिंट करने के लिए सागौन लकड़ी से बनाए गए लकड़ी के ब्लॉक का उपयोग किया जाता है। 

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