द्वितीय विश्व युद्ध के कारण-२

३- हिटलर की आक्रामक नीति:- 1934 ईस्वी में हिटलर जर्मनी के लोकप्रिय तानाशाह के रूप में सत्तासीन हुआ। उसने वर्साय की संधि का उल्लंघन करते हुए जर्मनी में एक शक्तिशाली सेना का गठन किया।हिटलर ने आक्रामक नीति अपनाकर राइनलैंड, ऑस्ट्रिया, मेमल और चेकोस्लाविया पर अधिकार कर लिया। हिटलर की इस कार्यवाही से मित्र राष्ट्र भयाक्रांत हो गए। फलस्वरूप उन्हें द्वितीय विश्व युद्ध के लिए तैयार होना पड़ा।
४- शस्त्रीकरण:- यद्यपि मित्र राष्ट्रों ने प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी की सैन्य संख्या को एक लाख तक सीमित कर दिया तथा पनडुब्बी व जंगी जहाज, गोला, बारूद आदि रखने का अधिकार भी उससे छीन लिया, किंतु मित्र राष्ट्रों ने अपने आयुध एवं सेना को बढ़ाने का कार्य निरंतर जारी रखा। 1934 ईस्वी में हिटलर ने जर्मनी का शस्त्रीकरण करना प्रारंभ कर दिया। फलत: यूरोप में आयुध संग्रह एवं विकास की होड़ लग गई। कालांतर में यह संग्रह द्वितीय विश्व युद्ध का कारण सिद्ध हुआ।
५- उग्र राष्ट्रीयता की भावना:- द्वितीय विश्वयुद्ध के पूर्व शक्ति संपन्न राष्ट्रों में उग्र राष्ट्रीयता की भावना पनप रही थी। इटली में मुसोलिनी तथा जर्मनी में हिटलर इसके ज्वलंत उदाहरण थे।
६-साम्राज्यवादी नीति:- प्रथम विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी राष्ट्रों ने जर्मनी को शक्तिहीन बनाकर उसके प्रदेशों एवं उपनिवेशन को हस्तगत कर लिया था। आगे चलकर मुसोलिनी ने एबीसीनिया अधिकृत कर लिया। जापान ने मंचूरिया अधिकृत कर साम्राज्यवादी नीति को प्रश्रय दिया। इन सब की परिणति द्वितीय विश्व युद्ध था।
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