*भारत के विदेश नीति गुटनिरपेक्षता अन्य राष्ट्रों से मैत्रीपूर्ण संबंध, पंचशील एवं शांतिपूर्ण सह अस्तित्व के सिद्धांतों पर आधारित है।
(1)- गुटनिरपेक्षता----- भारत की विदेश नीति गुटनिरपेक्षता पर आधारित नीति कहलाती है। द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात संसार दो गुटों में बट गया--- एक गुट रूस के नेतृत्व में समाजवादी देशों का बना और दूसरे गुट में अमेरिका के नेतृत्व में पूंजीवादी देश संगठित हुए । दोनों गुटों ने परस्पर विरोधी सैनिक संधियां की। इस प्रकार की गुड बंदी से संसार में तनाव और अविश्वास का वातावरण बन गया । भारत ने दोनों गुटों से अलग रहने का निर्णय लिया और इसी कारण भारत की विदेश नीति गुटनिरपेक्षता की नीति कहलाती है। भारत राष्ट्र की इस गुट बंदी और उनके परस्पर विरोधी सैनिक गठबंधन को विश्व शांति के लिए बहुत बड़ा खतरा मानता है। इसलिए उसने इन गुटों से दूर रहने का निर्णय लिया । भारत किसी गुटका पिछलग्गू नही है। वह अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं पर स्वतंत्र रूप से विचार करता है और अपनी नीति निर्धारित करता है। यही कारण है कि उसने रूस और अमेरिका दोनों के अन्याय और अनुचित कार्यों की आलोचना की है।
(2) पंचशील के सिद्धांत में आस्था--- भारत शांति का पुजारी है इसीलिए उसने विश्व में शांति स्थापित करने की नीति अपनाई है। सन 1954 ईस्वी में उसने पंचशील को अपनी विदेश नीति का अंग बनाया। पंचशील का सिद्धांत महात्मा बुद्ध के उन पांच सिद्धांतों पर आधारित है जो उन्होंने व्यक्तिगत आचरण के लिए निर्धारित किए थे। पंचशील के सिद्धांतों का सूत्रपात पंडित जवाहरलाल नेहरू वह चीन के प्रधानमंत्री चाऊ-एन-लाई के मध्य तिब्बत संबंधी समझौते के समय हुआ था।