मिशन शक्ति एक संयुक्त कार्यक्रम है जिसका संचालन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने संयुक्त रूप से किया है इस अभियान के अंतर्गत भारतीय वैज्ञानिकों के द्वारा एक उपग्रह नाशक अस्त्र को छोड़ा गया है जिसने पृथ्वी की निम्न कक्षा में अवस्थित एक जीवंत उपग्रह को मार गिराया यह जीवन उपग्रह भारत का ही एक ऐसा उपग्रह था जो अब काम में नहीं आने वाला था।
मिशन शक्ति का संचालन उड़ीसा के बालासोर में स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के प्रक्षेपण स्थल से हुआ था।
पृथ्वी की निम्न कक्षा - पृथ्वी की निम्न कक्षा उसे कहा जाता है जो पृथ्वी से 2000 किलोमीटर की ऊंचाई तक होती है जहां पर कोई उपग्रह धरातल और समुद्र सतह में चल रही गतिविधियों पर आसानी से नजर रख सकता है प्राय: इस प्रकार के उपग्रहों का प्रयोग जासूसी करने के लिए किया जाता है जो युद्ध के समय देश की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है।
भारत के द्वारा या परीक्षण पृथ्वी के निम्न कक्षा में इसलिए किया गया है ताकि अंतरिक्ष में किसी भी प्रकार का कोई मलबा एकत्रित ना हो सके और यदि कोई भी मलबा बना है तो वह क्षयग्रस्त होकर कुछ सप्ताह में पृथ्वी पर आ गिरेगा।
मिशन शक्ति के सफल परीक्षण के बाद भारत विश्व का चौथा ऐसा देश बन गया है जिसके पास ऐसी विशेषज्ञता और आधुनिक क्षमता है, भारत द्वारा किया गया यह प्रयास पूर्णता स्वदेशी है। इससे पहले केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास ही अंतरिक्ष में स्थित किसी जीवन लक्ष्य को भेदने की शक्ति प्राप्त थी। और अब भारत भी इस शक्ति में शामिल हो गया है।
वाह्य अंतरिक्ष में हथियारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानून भी बनाया गया है जिसमें अमेरिका रूस और चीन समेत सभी देशों ने 1967 की आउटर अंतरिक्ष संधि पर हस्ताक्षर किए थे और भारत ने इस संधि पर 1982 में हस्ताक्षर किया था यह समझौता इसलिए किया गया है ताकि कोई भी देश अंतरिक्ष में अपना क्षेत्राधिकार ना प्रदर्शित कर सके ।
इस समझौते के अंतर्गत किसी भी देश को पृथ्वी की कक्षा या उसके बाहर परमाणु हथियार रखने से रोकता है। यह संधि चंद्रमा और मंगल जैसे ग्रहों पर जहां मानव की पहुंच हो सकती है के लिए और भी कठोर बनाया गया है। और इस समझौते के अंतर्गत यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी देश इन ग्रहों में अपना सैन्य अड्डा नहीं बना सकता या किसी भी प्रकार का सैन्य संचालन नहीं कर सकता है और साथ ही साथ किसी अन्य प्रकार के पारंपरिक हथियारों का परीक्षण भी नहीं कर सकता है।