द्वितीय विश्व युद्ध के कारण- 3

लीग आव नेशंस की दुर्बलता:- प्रथम विश्व युद्ध के बाद संसार में शांति एवं सामूहिक सुरक्षा के लिए लीग ऑव नेशंस की स्थापना की गई किंतु इसके शक्तिशाली सदस्य राष्ट्रों की मनमानी एवं स्वार्थ प्रियता ने इसे अपने उद्देश्य में सफल नहीं होने दिया। राष्ट्र संघ विभिन्न राष्ट्रों के आक्रमणों को रोकने में सर्वथा असफल रहा । जापान द्वारा चीनी प्रदेश मंचूरिया पर 1931ई. में आक्रमण, इटली का एबीसीनिया पर आक्रमण, जर्मनी का 1938 ईस्वी में आस्ट्रिया पर अधिकार आदि घटनाओं ने लीग ऑव नेशंस की दुर्बलता को प्रकट कर दिया। इस प्रकार लीग ऑव नेशंस की असफलता द्वितीय विश्व युद्ध का कारण बनी।
तुष्टीकरण की नीति- दो विश्व युद्ध के मध्य इंग्लैंड ने जिस नीति का अनुसरण किया वह तुष्टीकरण की नीति के नाम से प्रसिद्ध है । इस नीति के कारण इंग्लैंड ने तानाशाहों की आक्रामक कार्यवाहिओं का विरोध नहीं किया अंततः द्वितीय विश्व युद्ध आवश्यक हो गया।
विश्वव्यापी आर्थिक मंदी:- प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात विश्वव्यापी आर्थिक मंदी की समस्या से सभी देश जूझ रहे थे। इसका भी प्रभाव द्वितीय विश्व युद्ध पर पड़ा।
रोम बर्लिन टोक्यो धुरी का निर्माण:- प्रथम विश्व युद्ध के समय ही मित्र राष्ट्रों का एक गुट बन गया था। 1937 ईस्वी में रोम- बर्लिन-टोक्यो धुरी के बन जाने से विश्व में दो शक्तिशाली गुट बन गए। इस प्रकार गुटबंदी के द्वारा भी द्वितीय विश्व युद्ध के लिए अनुकूल परिस्थितियों का सृजन हुआ।
तात्कालिक कारण:- तानाशाह हिटलर ने 1 सितंबर 1939 ईस्वी को पोलैंड पर आक्रमण कर दिया।पोलैंड की रक्षा के लिए इंग्लैंड और फ्रांस ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। इस प्रकार धीरे-धीरे द्वितीय विश्व युद्ध प्रारंभ हो गया।
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